लखनऊ, 31 जुलाई (आईएएनएस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने भदोही का नाम फिर से संत रविदास नगर किए जाने पर उत्तर प्रदेश सरकार का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार के दौरान महापुरुषों के नाम पर बनाए गए जिन जिलों के नाम बाद में बदल दिए गए थे, उन्हें भी बहाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने सरकार से मान्यवर कांशीराम समेत अन्य महापुरुषों के नाम वाले जिलों के पुराने नाम 9 अक्टूबर से पहले या उसी दिन बहाल करने की मांग की। बीएसपी प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जैसा कि मीडिया की खबरों से सर्वविदित है कि यूपी की वर्तमान सरकार ने बीएसपी सरकार द्वारा भदोही को राज्य मुख्यालय का दर्जा देते हुए संत रविदास नगर के नाम से नया जिला बनाया था और जिसे समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार ने अपनी संकीर्ण जातिवादी मानसिकता के तहत बदल दिया था, इसे अब फिर से संत रविदास नगर जिला स्थापित कर दिया है, जिसके लिए पार्टी राज्य सरकार की आभारी है।
उन्होंने कहा कि वास्तव में बीएसपी की यूपी में रही चारों सरकारों में प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने व आम जनहित को बेहतर बनाने के मद्देनज़र अनेकों नए जिले, तहसील, विकास खंड तथा पुलिस जोन व रेंज आदि बनाए गए और उनमें से कई जिलों के नाम दलित व अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) में समय-समय में जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के नाम पर रखे गए और इसी क्रम में संत रविदास नगर व छत्रपति शाहूजी महाराज नगर व भीम नगर आदि अनेकों नए जिले बने, जिनके नाम सपा सरकार ने केवल अपनी जातिवादी सोच, द्वेष व संकीर्ण राजनीति के कारण बदल दिए, जिसको लोग कभी भी भुला नहीं पाएंगे।
मायावती ने कहा कि इतना ही नहीं, बल्कि ब्रज क्षेत्र में कासगंज इलाके के समुचित विकास हेतु कासगंज को जिला मुख्यालय का दर्जा देते हुए कांशीराम के नाम पर नया जिला बनाया गया, जिसका भी नाम सपा सरकार ने अपने पीडीए-पिछड़ा दलित व अल्पसंख्यक विरोधी रवैयों के कारण बदल दिया।
उन्होंने कहा कि ऐसे में यूपी सरकार संत रविदास नगर की तरह ही, कांशीराम व अन्य महापुरुषों के नाम पर बनाए गए नए जिलों के भी असली नाम बहाल कर दे तो यह उचित होगा और यह कार्य अगर कांशीराम की दिनांक 9 अक्टूबर के परिनिर्वाण दिवस से पहले कर दिया जाए या उसी दिन ही कर दिया जाए तो बीएसपी इसके लिए आभारी रहेगी।