सरकार बच्चों की भावना समझे नहीं तो बहुत सारे आंदोलनों से गुजरना पड़ेगा: आनंद दुबे

सरकार बच्चों की भावना समझे नहीं तो बहुत सारे आंदोलनों से गुजरना पड़ेगा: आनंद दुबे

मुंबई, 26 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने केंद्र सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि संवाद से हर समस्या का हल निकल सकता है, लेकिन सरकार में यह एहसास बहुत देर से हुआ है।

आनंद दुबे ने व्यंग्य करते हुए कहा, “बहुत देर से दर पे आंखें लगी थीं, हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी।” उन्होंने आगे कहा कि “देर आए दुरुस्त आए।"

मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा जनवरी-फरवरी में ही दे देना चाहिए था, जब यूजीसी के विवाद का मामला सामने आया था। उस समय एक विशेष वर्ग के बच्चों के साथ अन्याय हो रहा था और तब से हम लगातार इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “यूजीसी विवाद के बाद मई में नीट पेपर लीक हो गया। तब भी हमने इस्तीफा मांगा। मई बीता, जून बीता और आखिरकार जुलाई के आखिरी सप्ताह में उन्होंने इस्तीफा दिया। दरअसल, बहुत देर से दर पर आंखें लगी थीं। हुजूर आते-आते बहुत देर कर दी। देर आए, दुरुस्त आए।”

आनंद दुबे ने कहा, “आज के बच्चों को समझ लीजिए। वे क्या चाहते हैं, उनकी भावनाओं को समझिए। नहीं तो बहुत सारे आंदोलनों से गुजरना पड़ेगा। हम विपक्ष में हैं। प्रदर्शन हो रहा है तो सरकार को चाहिए कि वे संवाद करें।

आनंद दुबे ने कहा कि जब कोई मंच तैयार होता है तो जनांदोलन का रूप ले लेता है, तो इसमें विपक्षी दल भी शामिल हो जाते हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है। लोग आते हैं, आंदोलन करते हैं। 2012-13 में अन्ना हजारे का आंदोलन देखा था, उसमें गैर-कांग्रेस के सभी नेता शामिल हो गए थे। लोग आते हैं, मुद्दों पर आंदोलन करते हैं और लड़ाई लड़ते हैं। हम समझते हैं कि इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए।

आनंद दुबे ने कहा कि अब यह विषय समाप्त हो चुका है। इस सरकार को एक सबक मिला है। अगर सरकार अभी भी नहीं जागी, तो बहुत देर हो जाएगी। 2029 से पहले जाग गई तो उन्हीं को फायदा होगा, नहीं जागी तो उन्हीं को नुकसान होगा।

इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा कि यह किसी विपक्षी पार्टी की जीत नहीं है। इसका श्रेय पूरे देश के युवाओं को जाता है। हमारी पार्टी ने इसे पुरजोर तरीके से उठाया, लेकिन यह एक पार्टी या एक मंच की जीत नहीं है। यह करोड़ों छात्रों की जीत है और देश की जीत है। अहंकारी तानाशाही सरकार की हार है।

--आईएएनएस

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