सुकमा: मड़कम भीमा ने हथियार छोड़कर की नई जिंदगी की शुरुआत, आवास और रोजगार से बने आत्मनिर्भर

सुकमा: मड़कम भीमा ने हथियार छोड़कर की नई जिंदगी की शुरुआत, आवास और रोजगार से बने आत्मनिर्भर

सुकमा, 3 जुलाई (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में शासन की पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाओं का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। कोंटा विकासखंड के ग्राम पंचायत पोलमपल्ली निवासी मड़कम भीमा की कहानी इसका एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है। कभी हिंसा और भय के रास्ते पर चलने वाले मड़कम भीमा ने अब विकास और लोकतंत्र की मुख्यधारा को अपनाकर नई जिंदगी की शुरुआत की है।

जिला प्रशासन, सुरक्षा बलों और शासन की समन्वित पहल के चलते मड़कम भीमा को समाज में सम्मानजनक तरीके से पुनर्स्थापित होने का अवसर मिला। मुख्यधारा में लौटने के बाद प्रशासन ने उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनने में मदद की।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का लाभ मिला। योजना के अंतर्गत स्वीकृत सहायता राशि से उनका पक्का मकान बनकर तैयार हुआ, जिससे उनके परिवार को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध हो सका। प्रशासन का कहना है कि यह केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे परिवार में स्थायित्व और भविष्य के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है।

इसके अलावा आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मड़कम भीमा को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से भी जोड़ा गया। गांव में चल रहे विकास कार्यों में हिस्सा लेकर उन्होंने नियमित रोजगार प्राप्त किया और मजदूरी की राशि सीधे उनके बैंक खाते में पहुंची। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया और आत्मविश्वास भी बढ़ा।

जिला प्रशासन का मानना है कि मड़कम भीमा की कहानी यह दर्शाती है कि प्रभावी पुनर्वास नीति और जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है। यह उदाहरण जिले के युवाओं के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि विकास, शिक्षा और आत्मनिर्भरता का मार्ग ही बेहतर भविष्य की ओर ले जाता है।

प्रशासन ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मड़कम भीमा की सफलता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी