चेन्नई, 15 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु सरकार द्वारा सरकारी अधिकारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी की शिकायत दर्ज कराने के लिए विशेष व्हाट्सऐप हेल्पलाइन शुरू किए जाने के कुछ घंटों बाद ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के एक पदाधिकारी को ठेकेदार से नकदी लेते हुए दिखाया गया है।
इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है और स्थानीय निकायों में भ्रष्टाचार को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
वीडियो में कथित तौर पर माम्बक्कम पंचायत के अध्यक्ष और टीवीके के चेंगलपट्टू पूर्व जिला संयुक्त सचिव एनवी वीरा को एक ठेकेदार से 30 हजार रुपए नकद लेते हुए दिखाया गया है।
वीडियो में बातचीत के दौरान एक अन्य व्यक्ति कथित रूप से यह कहते हुए सुनाई देता है कि 1 लाख रुपए पहले ही ट्रांसफर किए जा चुके हैं। माना जा रहा है कि यह वीडियो ठेकेदार ने गुप्त रूप से रिकॉर्ड किया था।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार, यह राशि कथित तौर पर सड़क निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ठेकेदार के बिल को मंजूरी दिलाने से जुड़ी थी। पैसे के लेन-देन की परिस्थितियों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही इस मामले में किसी औपचारिक शिकायत की सार्वजनिक जानकारी दी गई है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जिस दिन यह वीडियो सामने आया, उसी दिन तमिलनाडु सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अभियान को और मजबूत करते हुए सभी सरकारी कार्यालयों, जिला कलेक्टर कार्यालयों, स्थानीय निकायों और सार्वजनिक उपक्रमों में जागरूकता बोर्ड लगाने के निर्देश जारी किए।
इन बोर्डों पर तमिल और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखा जाएगा कि रिश्वत देना और लेना अपराध है और साथ ही सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय की व्हाट्सऐप हेल्पलाइन संख्या 94981 80936 भी प्रदर्शित की जाएगी।
मुख्य सचिव ने सभी सरकारी विभागों, जिला कलेक्टरों और सार्वजनिक उपक्रमों के प्रमुखों को निर्देश दिया है कि इन बोर्डों को प्रमुख स्थानों पर लगाया जाए। इस पहल का उद्देश्य लोगों को रिश्वत और भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायत सीधे डीवीएसी को व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की जा सके।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। विपक्षी दलों और कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी दावों पर सवाल उठाते हुए आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है।
फिलहाल, न तो तमिलनाडु सरकार और न ही टीवीके नेतृत्व ने वीडियो की प्रामाणिकता या संबंधित पदाधिकारी के खिलाफ किसी कानूनी, विभागीय अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी किया है।
यह मामला इसलिए भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है क्योंकि यह सरकार की नई भ्रष्टाचार विरोधी पहल के साथ ही सामने आया है।
--आईएएनएस
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