जयपुर, 21 सितंबर (आईएएनएस)। राजस्थान में निकाय चुनावों से ठीक पहले रविवार देर रात हुई एक असामान्य कार्यवाही में हाईकोर्ट ने रविवार रात 10 बजे से सोमवार तड़के तक एक विशेष सुनवाई की। इसमें हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों और बीकानेर के एक पार्षद को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी गई।
यह विशेष सुनवाई तब बुलाई गई जब निकाय चुनावों से ठीक पहले कई पार्षदों और उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज मामलों में गिरफ्तारी से तत्काल सुरक्षा की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की गईं। चिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि उनकी गिरफ्तारी उन्हें चुनाव में भाग लेने से रोक सकती है।
चीफ जस्टिस डॉ. संजय कुमार अग्रवाल के निर्देशों पर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए रविवार रात विशेष बेंच का गठन किया गया। इसके बाद विशेष बेंच ने देर रात पार्षदों से जुड़े मामलों पर सुनवाई की। कोर्ट ने हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों और बीकानेर के एक पार्षद को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दी, जिससे उन्हें चुनाव से पहले राहत मिली।
हनुमानगढ़ मामले में जस्टिस नूपुर भाटी की अध्यक्षता वाली विशेष बेंच ने मामले की सुनवाई की। निकाय में 60 सीटें हैं, जिनमें से बीजेपी ने 15 सीटें जीतीं। निर्दलीय विधायक गणेश बंसल खेमे के लगभग 32 पार्षदों ने स्थानीय चुनाव जीते हैं। इस बीच, बंसल को बीकानेर में 23 साल पुराने जमीन के मामले में गिरफ्तार किया गया।
बीकानेर मामले में जस्टिस सुनील बेनीवाल की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका पर सुनवाई की और रात लगभग 11.15 बजे कांग्रेस पार्षद मकसूद अहमद को गिरफ्तारी से सुरक्षा दी।
अहमद के वकील डॉ. सचिन आचार्य ने हाईकोर्ट को बताया कि पुलिस ने पार्षद को एक पुराने मामले के सिलसिले में बुलाया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस की कार्रवाई का समय अहमद को सोमवार को होने वाले चेयरपर्सन पद के मतदान में भाग लेने से रोक सकता है।
ये घटनाक्रम ऐसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में हुए हैं जब राजस्थान के कई शहरी स्थानीय निकायों में मेयर और चेयरपर्सन पदों के लिए चुनाव होने हैं।
जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों में मेयर पदों के लिए चुनाव 25 सितंबर को होने हैं जबकि कई अन्य नगर निकायों में भी चेयरपर्सन पद के चुनाव हो रहे हैं। कोर्ट ने रविवार को नागौर के पार्षद तेजपाल मिर्धा और श्रीविजयनगर के सुशील मीढ़ा की गिरफ्तारी पर भी अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।
इन याचिकाओं ने राजनीतिक मुकाबले को एक कानूनी पहलू दे दिया है क्योंकि पार्टियां अप्रत्यक्ष चुनावों से पहले पार्षदों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट की असामान्य रूप से देर रात हुई सुनवाई ने सबका ध्यान खींचा है क्योंकि यह सुनवाई नागरिक नेतृत्व के चुनावों से कुछ दिन पहले और राजनीतिक दलों के इन आरोपों के बीच हुई है कि पार्षदों पर उनके खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर दबाव डाला जा रहा है।
--आईएएनएस
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