नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पेपर लीक मामले को लेकर कांग्रेस को घेरा और सबसे शर्मनाक पेपर लीक का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' का पुरजोर समर्थन किया। पेपर लीक मामले पर उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह जायज थीं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के प्रमुख के तौर पर नहीं बल्कि युवाओं के अभिभावक के रूप में जवाब दिया है।
उन्होंने कहा, "इस पूरी बहस में सबसे शर्मनाक पेपर लीक की कहानी एक कांग्रेस मंत्री से जुड़ी है, जिसके अपने ही कार्यालय से परीक्षा के पेपर लीक हुए थे।
चड्ढा ने 2016 के कर्नाटक के मामले का जिक्र करते हुए कहा, "2016, कर्नाटक, कांग्रेस की सरकार। कक्षा 12 की केमिस्ट्री का पेपर लीक हुआ। री-एग्जाम का पेपर भी लीक हो गया। परीक्षा दो बार रद्द करनी पड़ी। इसके बाद सीआईडी ने मंत्री के अपने ही पीए को पेपर लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया। इस्तीफा नहीं आया, सिर्फ बहाना दिया गया। अब 2026 में देखिए, वही मंत्री आज फिर उसी विभाग को चला रहा है, कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के तहत। ये हैं कांग्रेस के जवाबदेही के मानक।"
अपने पहले की चुप्पी पर सफाई देते हुए चड्ढा ने कहा कि पहले वह विपक्ष की बेंच पर थे, लेकिन अब ट्रेजरी बेंच पर होने के नाते सिस्टम को ठोस समाधान से ठीक करने की उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
बहस के दौरान राज्यसभा सांसद ने जोर देकर कहा कि जब भी छात्रों से जुड़ा कोई मामला आया, केंद्र सरकार ने सुना, कार्रवाई की और परिणाम दिए।
उन्होंने पेपर लीक खत्म करने के लिए कंप्यूटरीकृत परीक्षाओं की ओर बढ़ने सहित कई पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक संगठित सिंडिकेट को लीक करने से रोकने के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करता है।
चड्ढा ने कोटा, चंडीगढ़, जयपुर, दिल्ली या पटना जैसे शहरों में बच्चों को पढ़ाने के लिए घर का बजट काटने और कर्ज लेने वाले परिवारों के त्याग का भी जिक्र किया, जहां छात्र 18 घंटे तक पढ़ाई करते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि एक लीक हुआ पेपर सालों की मेहनत को बर्बाद कर सकता है, विश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और आकांक्षाओं को तोड़ सकता है।
--आईएएनएस
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