पीएम मोदी की मिमिक्री पर प्रतुल शाह देव का हमला, बोले-राहुल गांधी 21वीं सदी के डॉन क्विक्सोट

राहुल गांधी 21वीं सदी के डॉन क्विक्सोट, सरकार की आलोचना पर प्रतुल शाह देव का हमला।
पीएम

नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री किए जाने को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस पूरे मामले को प्रधानमंत्री की दिवंगत मां के अपमान से जोड़ते हुए कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने भाजपा के आरोपों को गलत नैरेटिव करार दिया है।

इस विवाद पर दिल्ली में भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी को सोचना चाहिए कि क्या उनके लिए यह उचित है। कल उनकी माता सोनिया गांधी के लिए यदि कोई टिप्पणी करेगा तो क्या वो उचित होगा? तो यह निर्णय राहुल गांधी को लेना चाहिए था, लेकिन अफसोस की बात है कि निर्णय लेने में राहुल गांधी फेल हो गए और उस कॉमेडियन के साथ खुद भी अपने आप को उन्होंने देश में एक ऐसे कॉमेडियन के रूप में स्थापित कर लिया जो जनता को केवल मजे दे सकता है, लेकिन जनता के आंसू नहीं पोंछ सकता।"

वहीं रांची में भाजपा नेता प्रतुल शाह देव ने कहा, "राहुल गांधी 21वीं सदी के डॉन क्विक्सोट हैं। जिस तरह डॉन क्विक्सोट निकलते थे और आखिर में अपना ही मजाक बनवा बैठते थे, राहुल भी वैसा ही करते हैं। वह टाइटैनिक के उस कप्तान की तरह हैं जो आइसबर्ग ढूंढता है और जान-बूझकर उससे टकरा जाता है।"

प्रतुल शाह देव ने कहा, "प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाते-उड़ाते उन्होंने देश की माताओं का ही मजाक बना दिया है। अगर प्रधानमंत्री किसी बुजुर्ग महिला को कुर्सी दे रहे हैं, तो राहुल गांधी को इसमें मजाक की क्या बात दिखती है? इसमें कोई हैरानी की बात नहीं है कि वह भारतीय राजनीति के सबसे बड़े पॉलिटिकल जोकर हैं। उनसे बड़ा कोई नहीं है और न ही कोई होगा और जब तक वह कांग्रेस में हैं, हमारे लिए चीजें आसान हैं।"

इस पूरे विवाद पर रांची में जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे ने भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री की मां को कहां टारगेट किया गया।

मनोज पांडे ने कहा, "उनकी मां को टारगेट कैसे किया गया? जरा यह बताने का कष्ट किया जाए। एक गलत परसेप्शन क्रिएट न किया जाए। प्रधानमंत्री की मां का कहीं जिक्र नहीं है, कोई टारगेट नहीं किया गया, कहीं अपमानित करने की बात नहीं है। ऐसा होता तो सबसे पहले निंदा हम लोग करते। व्यंग्य के माध्यम से, हास्य के माध्यम से एक विषय पर बहुत गंभीर टिप्पणी की गई। आप अपने आचरण सुधारिए, व्यवहार सुधारिए। आप अपनी सोच को बदलिए।"

मनोज पांडे ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "गले लगना या चॉकलेट खिलाना विदेश नीति नहीं हो सकती। आज हम विदेश नीति में नाकाम हैं। अमेरिका लगातार हम पर टैरिफ पर टैरिफ लगा रहा है। हम सस्ते तेल खरीद नहीं पा रहे हैं, विदेशी निवेशक गायब हो रहे हैं और विदेशी कर्ज बढ़ता जा रहा है। ऐसी बहुत सारी बातें हैं, जिसे हास्य और व्यंग्य के माध्यम से एक कलाकार ने बताने का प्रयास किया था, परंतु संसद के अंदर हम लोगों ने देखा है कैसे प्रधानमंत्री खुद मिमिक्री करते थे।"

महिलाओं की गरिमा के मुद्दे पर भाजपा और योगी आदित्यनाथ पर पलटवार करते हुए पांडे ने कहा, "इसी को लेकर अगर हम महिलाओं की गरिमा की बात कर रहे हैं, तो हमें कुलदीप सेंगर, बृजभूषण शरण सिंह और स्वामी चिन्मयानंद के बारे में भी बात करनी चाहिए। अगर हम महिलाओं के सम्मान की बात कर रहे हैं तो कम से कम सीएम योगी को तो दूसरों को महिलाओं की गरिमा पर उपदेश नहीं देना चाहिए। उत्तर प्रदेश में महिलाओं की गरिमा को लेकर हालात सबसे खराब हैं।"

प्रतुल शाह देव ने जिस डॉन क्विक्सोट का जिक्र किया, वह ऐसे व्यक्ति को कहा जाता है, जो कल्पना और वास्तविकता में फर्क नहीं कर पाता। दरअसल एक स्पेनिश कुलीन व्यक्ति अलोंसो किहानो को वीर योद्धाओं की कहानियां पढ़ने का इतना शौक था कि वे खुद को एक बहादुर शूरवीर समझने लगे थे। उन्होंने अपना नाम बदलकर डॉन क्विक्सोट रख लिया और दुनिया में न्याय स्थापित करने तथा कमजोरों की रक्षा करने निकल पड़ते है, लेकिन अपने कार्यों की वजह से उपहास का पात्र बने

--आईएएनएस

पीआईएम/वीसी