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पटना : पीएमसीएच में डॉक्टरों पर हमले से भड़का आक्रोश, जेडीए अध्यक्ष ने कहा- अस्पताल में भी सुरक्षित नहीं

पीएमसीएच

पटना, 20 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में डॉक्टरों पर हमले के विरोध में जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी। अस्पताल परिसर में दो डॉक्टरों के साथ मारपीट की घटना के बाद जूनियर डॉक्टरों में आक्रोश फैल गया था। हालांकि, पीएमसीएच प्रबंधन के साथ बातचीत के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने का फैसला किया है।

पीएमसीएच के सुपरिंटेंडेंट डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार रात करीब 10 बजे एक गंभीर रूप से बीमार मरीज की मौत हो गई। मरीज के परिजनों ने इलाज से पहले लिखित रूप से यह स्वीकार किया था कि उन्हें मरीज की गंभीर स्थिति की जानकारी है और वे इलाज के लिए सहमत हैं। मरीज की मौत के कुछ घंटे बाद उसके कुछ रिश्तेदारों ने डॉक्टर के साथ हाथापाई शुरू कर दी। मौके पर मौजूद गार्ड ने किसी तरह डॉक्टर को बचाया।

डॉ. सिंह के अनुसार, इसके बाद आरोपी कुछ अन्य लोगों के साथ दोबारा अस्पताल परिसर में पहुंचे। उस समय कुछ मेडिकल छात्र बाहर एक दुकान पर चाय पी रहे थे, जिन पर हमला कर दिया गया।

पीएमसीएच जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) के अध्यक्ष डॉ. सत्यम ने आईएएनएस को बताया कि जूनियर डॉक्टर लाइब्रेरी से निकलकर पास की चाय की दुकान पर गए थे। इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टर और मरीज के साथ आए लोगों के बीच बहस हुई थी, जिसे बातचीत के जरिए शांत करा दिया गया था। लेकिन, बाद में आरोपियों ने इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लिया और 10 से 15 बाहरी लोगों को बुला लिया।

डॉ. सत्यम ने आरोप लगाया कि चाय की दुकान पर मौजूद डॉक्टरों पर रॉड से हमला किया गया। घटना में घायल डॉक्टर की स्थिति गंभीर बताई गई है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है।

जेडीए अध्यक्ष ने कहा कि घायल डॉक्टर की परीक्षा भी थी, जिसकी उन्होंने तैयारी की थी, लेकिन चोट के कारण वह परीक्षा नहीं दे सके। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल परिसर में यदि वे सुरक्षित नहीं हैं तो भविष्य में इससे भी गंभीर घटना हो सकती है।

उन्होंने मांग की है कि अज्ञात हमलावरों के खिलाफ संस्थागत एफआईआर दर्ज की जाए और अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। उन्होंने अस्पताल में तैनात गार्डों की भूमिका और उनके अधिकारों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सुरक्षा कर्मचारियों को पर्याप्त अधिकार दिए जाने चाहिए, ताकि किसी भी हमलावर को समय रहते रोका जा सके।

पीएमसीएच प्रबंधन के साथ बातचीत के बाद जूनियर डॉक्टरों ने फिलहाल काम पर लौटने का फैसला किया है। हालांकि, डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल में सुरक्षा उनकी प्रमुख चिंता बनी हुई है।

--आईएएनएस

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