भुवनेश्वर, 31 जुलाई (आईएएनएस)। ओडिशा में बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण कई जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। इस बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के प्रमुख भक्त चरण दास ने राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन व्यवस्था और राहत कार्यों को लेकर आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पूरा राज्य बाढ़ की मार झेल रहा है, तब मुख्यमंत्री और सरकार के कई मंत्री दिल्ली में मौजूद हैं, जिससे लोगों में सरकार के प्रति भरोसा कमजोर हो रहा है।
भक्त चरण दास ने कहा कि ओडिशा की चारों दिशाओं में बाढ़ की गंभीर स्थिति बनी हुई है। उत्तर ओडिशा के अधिकांश हिस्सों में बाढ़ का व्यापक असर देखने को मिल रहा है और कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है। बाढ़ से अब तक लगभग 12 लोगों की मौत की खबर है, जबकि सरकार सात लोगों की मौत की पुष्टि कर रही है। इसके अलावा पांच से अधिक लोगों के लापता होने की भी बात सामने आ रही है। नदियों का बहाव लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में बाढ़ की स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है।
सरकार पर निशाना साधते हुए भक्त चरण दास ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब पूरा ओडिशा बाढ़ और जलभराव की समस्या से जूझ रहा है, उस समय मुख्यमंत्री दिल्ली में हैं। साथ ही, सांसद, मंत्री और विधायक भी वहां विभिन्न कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। आपदा के समय सरकार का पूरा ध्यान प्रभावित लोगों की सहायता पर होना चाहिए, लेकिन मौजूदा स्थिति सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाती है। ऐसे समय में जनता का सरकार पर विश्वास कमजोर होता है।
भक्त चरण दास ने बताया कि उन्होंने राज्य सरकार को पत्र लिखकर भद्रक के कलेक्टर का कार्यकाल तत्काल बढ़ाने की मांग की है। वर्तमान आपदा की स्थिति में प्रत्येक जिले में अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी की आवश्यकता है। ऐसे में जिन अधिकारियों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उन्हें स्थिति सामान्य होने तक विस्तार देकर राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि हर वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, समीक्षा बैठकें और आवश्यक व्यवस्थाएं की जानी चाहिए, लेकिन इस बार सरकार समय रहते जरूरी एहतियाती कदम उठाने में विफल रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि यदि पहले से समुचित तैयारी होती तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। उन्होंने बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की भी जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर राज्य की नदियां समुद्र में मिलती हैं, वहां वर्षों से रेत जमने की समस्या बनी हुई है। समुद्र और नदियों से आने वाली रेत के कारण जल निकासी बाधित होती है, जिससे नदी का पानी तेजी से नहीं निकल पाता और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक जलभराव हो जाता है। सरकार को इस दिशा में दीर्घकालिक योजना बनाकर कार्य करना चाहिए ताकि भविष्य में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या से राहत मिल सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि नयागढ़ जैसे कुछ क्षेत्रों की स्थिति को लेकर सरकार के पास पूरी और अद्यतन जानकारी तक उपलब्ध नहीं है। कई इलाकों में अब भी पानी भरा हुआ है और प्रशासन को वास्तविक स्थिति का समुचित आकलन कर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य तेज करने की आवश्यकता है।