हावेरी, 3 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बसवराज बोम्मई ने हावेरी जिले के हंगल तालुक के नरेगल गांव में हुई सांप्रदायिक हिंसा की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने जिले में कानून-व्यवस्था पूरी तरह विफल होने का आरोप लगाते हुए हावेरी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के खिलाफ कार्रवाई और हंगल सर्किल पुलिस इंस्पेक्टर (सीपीआई) तथा सब-इंस्पेक्टर (एसआई) को निलंबित करने की भी मांग की।
हावेरी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हावेरी लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले बोम्मई ने कहा कि जिले में सांप्रदायिक घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और पुलिस इन्हें रोकने में नाकाम रही है।
उन्होंने कहा, "यह पहली घटना नहीं है। पिछले एक वर्ष में जिले में यह सातवीं या आठवीं सांप्रदायिक घटना है। नरेगल गांव पिछले तीन दशकों से कई बार सांप्रदायिक तनाव का गवाह रहा है।"
बोम्मई ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में इस विवाद का स्थायी समाधान निकालने के लिए मस्जिद को अतिरिक्त भूमि आवंटित की गई थी और श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश मार्ग बनाया गया था।
उन्होंने दावा किया कि तत्कालीन उपायुक्त ने मुख्य सड़क सभी लोगों के लिए खुली रखने के आदेश भी जारी किए थे, लेकिन पुलिस ने उन फैसलों को लागू नहीं किया।
उन्होंने आरोप लगाया, "कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों की है, वही इसके बिगड़ने के लिए जिम्मेदार बन गए हैं। नरेगल, बोम्मनहल्ली और बंकापुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कोई एहतियाती कदम नहीं उठाए गए। ऐसी स्थिति में केवल दो पुलिसकर्मियों के साथ '112' पुलिस वाहन भेजना पर्याप्त नहीं था।"
बोम्मई ने हावेरी के एसपी, हंगल के सीपीआई और एसआई को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उनकी लापरवाही के कारण हालात बिगड़े।
उन्होंने एसपी द्वारा घटना को "व्यक्तिगत विवाद" बताए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि यह निजी विवाद था तो क्या दोनों पक्षों के बीच जमीन या किसी अन्य निजी मामले को लेकर विवाद था? उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस घटना की गंभीरता को कम करके दिखाने और सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रही है।
बोम्मई ने कहा कि इस मामले में जिला पुलिस से न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती, इसलिए एसआईटी गठित कर निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि आमतौर पर पुलिस दोनों पक्षों के 20-20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर औपचारिकता पूरी कर देती है, लेकिन इससे न्याय नहीं मिलता।
पूर्व मुख्यमंत्री ने हंगल की पिछली घटनाओं का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि गंभीर आपराधिक मामलों, आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े आरोपियों और सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों को जमानत मिलने के बाद पुलिस सुरक्षा में जुलूस निकालने की अनुमति दी गई।
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हिंसा करने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि पीड़ितों के खिलाफ ही मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
बोम्मई ने कहा कि वह इस मामले को मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के समक्ष उठाएंगे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वह पहले ही हावेरी एसपी से बात कर चुके हैं और एसआईटी जांच तथा स्थानीय पुलिस अधिकारियों के निलंबन की मांग दोहराई है।
हंगल के विधायक द्वारा भाजपा पर इस घटना का राजनीतिकरण करने के आरोपों का जवाब देते हुए बोम्मई ने कहा कि जब किसी गांव में दो समुदायों के बीच टकराव होता है तो उसे व्यक्तिगत विवाद कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में कोई निजी विवाद था तो पुलिस उसे सार्वजनिक करे, अन्यथा ऐसे बयान केवल प्रशासनिक विफलता और तुष्टिकरण की राजनीति पर पर्दा डालने के लिए दिए जा रहे हैं।
--आईएएनएस
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