बागपत, 26 जुलाई (आईएएनएस)। आजाद हिंद फौज (आईएनए) की रानी झांसी रेजिमेंट की पहली महिला सिपाही नीरा आर्य की पुण्यतिथि के अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पड़पोती राजश्री चौधरी उत्तर प्रदेश के बागपत पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने नीरा आर्य को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि देश की युवा पीढ़ी को उनके त्याग और राष्ट्रभक्ति से प्रेरणा लेनी चाहिए।
राजश्री चौधरी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "नीरा आर्य आजाद हिंद फौज की रानी झांसी रेजिमेंट की पहली महिला सिपाही थीं और उनकी पुण्यतिथि पर उनके जन्मस्थान बागपत आकर श्रद्धांजलि देना उनके लिए गर्व की बात है। स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं का योगदान अतुलनीय रहा है और ऐसे महान सेनानियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।"
देश में हाल के छात्र आंदोलनों और पेपर लीक के मुद्दे पर उन्होंने कहा, "यदि युवा जागरूक होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हैं तो यह सरकार और जनता दोनों के हित में है। इससे सरकार को अपनी कमियों को सुधारने का अवसर मिलता है और आम लोगों में भी व्यवस्था की खामियों के प्रति जागरूकता बढ़ती है।"
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी जन आंदोलन की पवित्रता तब प्रभावित होती है जब उसमें आपराधिक तत्व या राजनीतिक स्वार्थ शामिल हो जाते हैं। उनके अनुसार कुछ लोगों और विपक्ष के कुछ नेताओं ने छात्रों के आंदोलन का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए किया, जबकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार को घेरने के लिए विधानसभा जैसे संवैधानिक मंच पहले से मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन को राजनीति से दूर रखना चाहिए।
राजश्री चौधरी ने बताया, "केंद्र सरकार ने छात्रों की मांगों का सम्मान करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार किया है। यह युवाओं की आवाज का सम्मान है। यदि पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा है तो अन्य राज्यों में भी ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर समान कार्रवाई होनी चाहिए। अगर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने पेपर लीक के मुद्दे पर इस्तीफा दिया है, तो पंजाब के शिक्षा मंत्री को भी इस्तीफा देना चाहिए।"
इस अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करीबी सहयोगी रहे 102 वर्षीय आर. माधवन पिल्लई भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1942 से वे नेताजी के लिए फंड जुटाने का काम करते थे। वर्ष 1943 में बर्मा में उनकी ड्यूटी फंड कलेक्शन की थी। बाद में नेताजी ने उन्हें आजाद हिंद फौज में शामिल किया, जिसके बाद उन्होंने अनेक युवाओं को भी आईएनए से जोड़ने का कार्य किया। नेताजी का सपना एक मजबूत, आत्मनिर्भर और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने वाला भारत था, जिसे नई पीढ़ी को आगे बढ़ाना चाहिए।