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मुल्लापेरियार विवाद: केरल ने नए बांध का खर्च उठाने की पेशकश की, तमिलनाडु ऊंचाई बढ़ाने पर अड़ा

मुल्लापेरियार

चेन्नई/महाबलीपुरम, 20 अगस्त (आईएएनएस)। केरल और तमिलनाडु के बीच मुल्लापेरियार विवाद में गुरुवार को भी कोई ढील नहीं दिखी। केरल ने गतिरोध तोड़ने के लिए एक नया प्रस्ताव रखा, जिसमें उसने नए बांध की पूरी लागत वहन करने पर सहमति जताई। वहीं, तमिलनाडु ने मौजूदा जलाशय में जलस्तर बढ़ाकर 152 फीट करने की अपनी मांग दोहराई।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में अपने संबोधन में केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा कि जन सुरक्षा के हित में मुल्लापेरियार में एक नया बांध बनाना आवश्यक है।

सतीशन ने इसे केरल द्वारा एक बड़ी रियायत बताते हुए कहा कि राज्य नए बांध के निर्माण की पूरी लागत वहन करने के लिए तैयार है।

केरल ने यह भी संकेत दिया कि प्रस्तावित संरचना के स्थान का निर्धारण तमिलनाडु कर सकता है, ताकि लंबे समय से लंबित इस प्रस्ताव से जुड़ी प्रमुख चिंताओं में से एक का समाधान किया जा सके।

यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत में दशकों से सबसे विवादास्पद अंतर-राज्यीय मुद्दों में से एक विवाद बना हुआ है।

केरल लगातार यह कहता रहा है कि पुराना मुल्लापेरियार बांध सुरक्षा के लिहाज से खतरा है और उसने इसके स्थान पर एक नई संरचना बनाने की मांग की है, जबकि तमिलनाडु ने इस मांग का विरोध करते हुए मौजूदा बांध को सुरक्षित बताया है।

तमिलनाडु ने बैठक में अपने स्थापित रुख से पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मांग की कि मौजूदा मुल्लापेरियार जलाशय में जलस्तर बढ़ाकर 152 फीट किया जाए।

दोनों राज्यों के बीच के इस विरोधाभासी रुख ने एक बार फिर दोनों राज्यों के मूलभूत मतभेदों को उजागर कर दिया।

केरल ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर जोर दिया और एक नए बांध की मांग की, जबकि तमिलनाडु मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने और जलाशय का जलस्तर बढ़ाने पर अड़ा रहा।

यह ताजा बहस इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय तक चली बातचीत, कानूनी लड़ाइयों और विभिन्न स्तरों पर बार-बार हस्तक्षेप के बावजूद यह मुद्दा अनसुलझा ही रहा है।

केरल की नए बांध का पूरा वित्तीय भार उठाने और तमिलनाडु को बांध का स्थान चुनने की अनुमति देने की इच्छा से प्रतिस्थापन परियोजना पर कुछ व्यावहारिक आपत्तियां दूर हो सकती हैं।

हालांकि, तमिलनाडु की 152 फीट जलस्तर की नई मांग से संकेत मिलता है कि मूल विवाद अभी भी सुलझा नहीं है।

--आईएएनएस

एमएस/