भोपाल, 26 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में बच्चों में बढ़ती बीमारी को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने सरकार और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाए हैं। माकपा का आरोप है कि भाजपा के बीमारू प्रदेश से विकसित प्रदेश बनाने के दावों की पोल खुल रही है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि पूरे प्रदेश में एक साथ खसरे के प्रकोप ने मासूमों को अपने चंगुल में फंसा लिया है। जब मासूमों की जान खतरे में है, तब भाजपा की मोहन यादव सरकार के बीमारू प्रदेश से विकसित प्रदेश हो जाने के खोखले दावों की पोल भी खुल रही है।
उन्होंने कहा है कि यदि उत्तरी मध्य प्रदेश जैसे तुलनात्मक रूप से विकसित क्षेत्र में खसरा सबसे ज्यादा पांव पसार रहा है, तो राजधानी भोपाल भी इसकी चपेट में है। आदिवासी क्षेत्रों की भयावह स्थिति की कल्पना आसानी से की जा सकती है, क्योंकि कुपोषित होने के कारण वहां प्रतिरोधक क्षमता भी कम होने से आदिवासी और गरीब बच्चे ही बीमारी का पहला शिकार होते हैं।
माकपा नेता का आरोप है कि इससे भाजपा सरकार की दो तरह की आपराधिक लापरवाही उजागर हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आकड़ों के अनुसार ही पिछले तीन सालों में खसरे के मरीजों की संख्या चिंताजनक तरीके से बढ़ रही है, जिससे साफ है कि भाजपा टीकाकरण का सरकारी दावा हवा हवाई हो गया है। जिन क्षेत्रों में टीकाकरण 90 प्रतिशत से कम होता है, वहां पर विशेष अभियान चलाए जाने की जरूरत होती है, मगर भाजपा सरकार कागजी खानापूरी को ही अभियान की सफलता मान लेती है और उसी का परिणाम मासूम परेशानी में है।
जसविंदर सिंह ने कहा कि बारिश के मौसम में खसरे और दूसरी मौसमी बीमारियों, जैसे हैजा, उल्टी दस्त और मलेरिया का हमला होता है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इसकी रोकथाम के लिए विशेष प्रबंध करने होते हैं। जब प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग का ढांचा ही चरमरा रहा है, तब बारिश से पहले रोकथाम के उचित कदमों की उम्मीद कैसे की जा सकती है। अभी भी प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर युद्ध स्तरीय अभियान चलाकर जांच करने के लिए कोई पहल कदमी दिखाई नहीं दे रही है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने खसरे के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने, रोकथाम की व्यवस्था करने और बीमार बच्चों के उपचार की समुचित व्यवस्था करने की मांग की है।
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