पटना, 15 जुलाई (आईएएनएस)। जेडीयू के विधायक श्याम रजक ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, आमिर खान की शादी, पश्चिम बंगाल में पिछड़ा वर्ग सूची में मुस्लिम जातियों को शामिल करने और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से जुड़े मामले पर अपनी राय रखी।
जेडीयू के विधायक श्याम रजक ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी हॉस्टल मेस में नॉनवेज भोजन पर रोक लगाने से पहले कॉलेज प्रशासन की पहली जिम्मेदारी साफ-सफाई और व्यवस्था बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि अगर किसी जगह साफ-सफाई की कमी है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य या अन्य कारणों से केवल शाकाहारी भोजन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया जाता है तो ऐसा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों के चांसलर यानी कुलाधिपति के पास ऐसे फैसले लेने का अधिकार होता है।
आमिर खान की तीसरी शादी को लेकर महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए श्याम रजक ने अभिनेता का बचाव किया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की देशभक्ति का आकलन उसकी निजी जिंदगी के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तीन बार शादी करना इस बात का प्रमाण नहीं है कि कोई व्यक्ति देशविरोधी है। देश के प्रति किसी व्यक्ति की प्रतिबद्धता और उसके कार्य ही उसकी पहचान तय करते हैं।
श्याम रजक ने कहा कि आमिर खान ने लगातार देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी और सामाजिक मुद्दों पर अपनी संवेदनशीलता दिखाई है। उन्होंने कहा कि बिना किसी ठोस प्रमाण के किसी की देशभक्ति पर सवाल उठाना उचित नहीं है। अगर किसी के पास उनके खिलाफ कोई सबूत है तो उसे सार्वजनिक करना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में पिछड़ा वर्ग की सूची में 17 मुस्लिम जातियों को शामिल किए जाने के मुद्दे पर श्याम रजक ने धर्म के आधार पर समाज को बांटने की राजनीति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि देश के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि अब हर मुद्दे को धर्म से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे सामाजिक माहौल खराब होता है और लोगों के बीच दूरी बढ़ती है।
वहीं, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने के निर्देश पर श्याम रजक ने कहा कि यह मामला लंबे समय से लंबित है और अदालत का निर्देश उचित है। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले का जल्द निपटारा होना चाहिए ताकि सच सामने आ सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत देना या नहीं देना न्यायपालिका का अधिकार है और इसमें नेताओं की कोई भूमिका नहीं होती।
--आईएएनएस
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