महाराष्ट्र की बड़ी पहल: वैश्विक कार्यबल गतिशीलता नीति 2026 लॉन्च, कौशल पासपोर्ट और नैतिक भर्ती पर फोकस

महाराष्ट्र की वैश्विक कार्यबल गतिशीलता नीति 2026: युवाओं को कौशल और अंतर्राष्ट्रीय रोजगार के लिए प्रशिक्षित करना
महाराष्ट्र

मुंबई, 21 सितंबर (आईएएनएस)। वैश्विक रोजगार की बदलती जरूरतों के अनुरूप, महाराष्ट्र के युवाओं को कौशल और भाषा प्रशिक्षण प्रदान करके अंतर्राष्ट्रीय रोजगार के लिए सशक्त बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न देशों की कुशल जनशक्ति की आवश्यकता को पहचानते हुए देशवार 'कौशल पासपोर्ट' तैयार करने, औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और अन्य प्रशिक्षण संस्थानों को अपने पाठ्यक्रम को अपडेट करने और वैश्विक कार्यबल गतिशीलता नीति के तहत महाराष्ट्र के लिए विदेश में रोजगार के लिए एक सुरक्षित भर्ती प्रणाली विकसित करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री फडणवीस सह्याद्री गेस्ट हाउस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय श्रम गतिशीलता पर एक दिवसीय उच्च स्तरीय सम्मेलन में बोल रहे थे। यह सम्मेलन महाराष्ट्र इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन (मित्रा), प्रोटोकॉल विभाग, कौशल, रोजगार, उद्यमिता और नवाचार विभाग और महाराष्ट्र एजेंसी फॉर होलिस्टिक इंटरनेशनल मोबिलिटी एंड एडवांसमेंट (महिमा) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बदलती जनसंख्या और बढ़ती वृद्धावस्था के कारण कुशल मानव संसाधन की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है। भारत के युवा मानव संसाधन की क्षमता को ध्यान में रखते हुए कुशल मानव संसाधन और वैश्विक मांग का प्रभावी संयोजन सुनिश्चित किया जाएगा। इससे 'प्रतिभा की चक्रीय गतिशीलता' की अवधारणा को और अधिक बल मिलेगा और महाराष्ट्र इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत ने लगभग 28 देशों के साथ श्रम गतिशीलता समझौते किए हैं। इन देशों में इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, निर्माण और विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की भारी मांग है। विश्व आर्थिक मंच की 'फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025' के अनुसार, 2030 तक विश्व स्तर पर लगभग 17 करोड़ नए रोजगार सृजित होंगे, जबकि लगभग 9 करोड़ 20 लाख रोजगार विस्थापित होने का अनुमान है। इस पृष्ठभूमि में, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र अंतरराष्ट्रीय कार्यबल गतिशीलता के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

भर्ती एजेंसियों के अनुभव का उपयोग विभिन्न देशों की मानव संसाधन आवश्यकताओं के बारे में प्रशिक्षण संस्थानों को जानकारी देने के लिए किया जाना चाहिए। पारंपरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ डिजिटल और आमने-सामने के प्रशिक्षण का संयोजन भी अपनाया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री फडणवीस ने निर्देश दिया कि ऑनलाइन भाषा प्रशिक्षण के लिए एक निश्चित अवधि, न्यूनतम परीक्षाएं और डिजिटल अनुवाद एवं व्याख्या उपकरण का उपयोग किया जाना चाहिए।

राज्य सरकार की मसौदा नीति में कौशल विकास, वैश्विक मांग के अनुरूप प्रशिक्षण, भाषा प्रशिक्षण, प्रमाणन, दस्तावेज़ संबंधी सहायता और प्रस्थान-पूर्व मार्गदर्शन को प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विदेश से लौटे कुशल मानव संसाधन को राज्य के उद्योगों से जोड़ने पर भी ध्यान केंद्रित करेगी।

केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया भाषिनी, मित्र और 'महिमा' ने महाराष्ट्र के युवाओं के लिए विदेश में रोजगार के अवसर सुगम बनाने और भाषा संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। उम्मीदवारों को अनुवाद तकनीक के माध्यम से विदेशी और व्यावसायिक भाषाओं में निःशुल्क और आसान प्रशिक्षण मिलेगा। इस पायलट परियोजना से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और तकनीकी कॉलेजों के छात्रों को लाभ होगा।

प्रोटोकॉल राज्य मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय श्रम गतिशीलता केवल मानव संसाधन के प्रवास की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि कौशल, निवेश, भारतीय प्रवासी और वैश्विक बाजार को जोड़ने वाली एक आर्थिक साझेदारी है। मुंबई में विदेशी वाणिज्य दूतावासों का नेटवर्क, उद्योगों, विश्वविद्यालयों और कौशल विकास संस्थानों के साथ समन्वय महाराष्ट्र की प्रतिभा को वैश्विक अवसरों से जोड़ेगा।

--आईएएनएस

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