सीबीआई ने 40 लाख रुपए की रिश्वत मामले में फरार महाराष्ट्र सीजीएसटी अधिकारी को गिरफ्तार किया

सीबीआई ने ऋषिकेश से सीजीएसटी अधिकारी को गिरफ्तार किया
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मुंबई, 21 सितंबर (आईएएनएस)। सीबीआई ने उत्तराखंड के ऋषिकेश से सीजीएसटी के एक अधिकारी को 40 लाख रुपए की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया है। यह मामला महाराष्ट्र के रायगढ़ की एक कंपनी के खिलाफ चल रही कार्रवाई से जुड़ा था।

अधिकारी ने बताया कि सीजीएसटी के एडिशनल कमिश्नर विनय कुमार कंथेटी 16 सितंबर से फरार थे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी और दो अन्य सह-आरोपियों की जमानत रद्द कर दी थी और उन्हें सीबीआई के सामने सरेंडर करने का आदेश दिया था।

बयान में कहा गया है कि हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने के बजाय कंथेटी फरार हो गए थे। अब उन्हें ऋषिकेश में ढूंढ निकाला गया है और सीबीआई ने हिरासत में ले लिया है।

सीबीआई ने बताया कि उनके सहयोगी और सीजीएसटी रायगढ़ के सुपरिटेंडेंट राकेश कुमार सिन्हा और एक प्राइवेट व्यक्ति नरिंदर राजपूत पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की मुंबई स्थित एंटी-करप्शन ब्रांच ने 26 अगस्त को 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988' की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया था।

यह मामला एक शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सीजीएसटी रायगढ़ (खंडेश्वर) के एक सुपरिटेंडेंट ने रिश्वत की मांग की थी। सीबीआई ने बताया कि आरोप था कि शिकायतकर्ता की फर्म से जुड़ी कार्यवाही के सिलसिले में 1.50 करोड़ रुपए की रिश्वत की मांग की गई थी, जिसे बाद में घटाकर 40 लाख रुपए कर दिया गया था।

एजेंसी ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने 27 अगस्त को एक जाल बिछाया। इस दौरान एक प्राइवेट व्यक्ति/कस्टम्स हाउस एजेंट को सीजीएसटी रायगढ़ के सुपरिटेंडेंट और एडिशनल कमिश्नर की ओर से कथित तौर पर 40 लाख रुपए लेते हुए पकड़ा गया।

सीबीआई ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और उन्हें ठाणे की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में पेश किया। सीबीआई ने पूछताछ के लिए पांच दिन की पुलिस कस्टडी की मांग की थी।

बयान के अनुसार, 28 अगस्त के आदेश में स्पेशल कोर्ट ने कस्टडी की मांग को खारिज कर दिया, गिरफ्तारियों को गैरकानूनी माना और आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया।

सीबीआई ने स्पेशल कोर्ट के आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने एजेंसी की अपील स्वीकार कर ली, स्पेशल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और तीनों आरोपियों को दो दिन की सीबीआई कस्टडी में भेज दिया।

बयान में कहा गया है कि रिकॉर्ड की जांच के बाद, हाई कोर्ट ने पाया कि गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी आरोपी को लिखित रूप में दी गई थी और परिवार के सदस्यों व वकीलों को भी विधिवत सूचित किया गया था।

सीबीआई ने बताया कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद, आरोपी सुपरिटेंडेंट और आरोपी प्राइवेट व्यक्ति को दो दिन के लिए सीबीआई की हिरासत में लिया गया और बाद में कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

हालांकि, आरोपी एडिशनल कमिश्नर हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने के बजाय फरार हो गए। सीबीआई ने बताया कि अब उन्हें ऋषिकेश से गिरफ्तार कर लिया गया है।

--आईएएनएस

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