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केरल हाईकोर्ट ने 2015 के विधानसभा हंगामा मामले में चार पूर्व यूडीएफ विधायकों के खिलाफ दर्ज केस किया रद्द

केरल

कोच्चि, 18 अगस्त (आईएएनएस)। केरल हाईकोर्ट ने 2015 के विधानसभा हंगामा मामले में मंगलवार को सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ को बड़ा झटका देते हुए चार पूर्व यूडीएफ विधायकों के खिलाफ दर्ज मामला रद्द कर दिया। इन नेताओं पर विधानसभा के अंदर हुए हंगामे के दौरान वामपंथी विधायकों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार का आरोप था।

इस फैसले के बाद सार्वजनिक संपत्ति नुकसान मामले में एलडीएफ नेताओं के खिलाफ मुकदमा जारी रहेगा, जबकि यूडीएफ नेताओं के खिलाफ दर्ज जवाबी मामला पूरी तरह खत्म हो गया है।

हाईकोर्ट ने तत्कालीन विधायक के. शिवदासन नायर, एमए वाहिद, डोमिनिक प्रेजेंटेशन और एटी जॉर्ज को बरी कर दिया। साथ ही तिरुवनंतपुरम की मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें उन्हें मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया गया था।

यह मामला विधानसभा में हुए हंगामे के दौरान तत्कालीन एलडीएफ महिला विधायकों केके लथिका और जमिला प्रकाशम को रोकने, उनके साथ दुर्व्यवहार करने और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोपों से जुड़ा था।

पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 341, 323 और 34 के तहत केस दर्ज किया था। के. शिवदासन नायर को मुख्य आरोपी और अन्य तीन नेताओं को सह आरोपी बनाया गया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप साबित नहीं होता है और मामले को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार भी नहीं है।

अदालत ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें मामले को सुनवाई योग्य माना गया था।

इस फैसले को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि चार यूडीएफ नेताओं के खिलाफ यह जवाबी मामला उस समय सामने आया था, जब एलडीएफ के कई नेता विधानसभा में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के प्रमुख मामले में आरोपी बने थे।

मूल घटना 13 मार्च 2015 की है, जब एलडीएफ विधायकों ने तत्कालीन वित्त मंत्री केएम मणि को बजट पेश करने से रोकने के लिए विधानसभा के अंदर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था।

इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी को नुकसान पहुंचा था, जबकि कंप्यूटर, कुर्सियां, माइक्रोफोन और अन्य उपकरण भी तोड़फोड़ का शिकार हुए थे, जिससे सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा था।

इस मामले में एलडीएफ के छह प्रमुख नेता वी शिवनकुट्टी, ईपी जयराजन, केटी जलील, के अजित, के कुन्हाम्मद मास्टर और सीके सदाशिवन अब भी आरोपी हैं।

एलडीएफ सरकार ने अपने नेताओं के खिलाफ चल रहे मामले को वापस लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने कड़ी टिप्पणियों के साथ इस मांग को खारिज कर दिया था।

एलडीएफ के सत्ता में आने के बाद क्राइम ब्रांच ने चार यूडीएफ नेताओं के खिलाफ मामले को आगे बढ़ाया था। उस समय इसे एलडीएफ नेताओं के खिलाफ चल रहे मुकदमे के जवाबी राजनीतिक कदम के रूप में देखा गया था।

यूडीएफ नेताओं का कहना था कि उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है ताकि सत्तारूढ़ मोर्चे के नेताओं के खिलाफ लगे आरोपों का असर कम किया जा सके। हाईकोर्ट के ताजा फैसले ने इस मामले को समाप्त कर दिया है।

इसके साथ ही विधानसभा हंगामा मामले का राजनीतिक समीकरण बदल गया है। यूडीएफ नेता अब इस मामले से मुक्त हो गए हैं, जबकि एलडीएफ नेताओं को मुख्य मामले में अभी भी अदालत का सामना करना पड़ेगा।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी