तिरुवनंतपुरम, 21 सितंबर (आईएएनएस)। केरल की वीडी सतीशन सरकार ने 'लोक केरल सभा' को उसके मौजूदा स्वरूप में आयोजित करने से इनकार कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि पिछली एलडीएफ सरकार द्वारा स्थापित विवादास्पद मंच को बंद करने के यूडीएफ सरकार के निर्णय में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 'लोक केरल सभा' दुनियाभर में बसे केरल मूल के लोगों को राज्य के विकास से जोड़ने के लिए केरल सरकार द्वारा शुरू किया गया एक मंच है।
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि एलडीएफ सरकार के दौरान जिस तरीके से लोक केरल सभा आयोजित की जाती थी, उसे जारी रखने पर सरकार कोई विचार नहीं कर रही है।
सीएमओ ने यह भी साफ किया कि आगामी वित्तीय वर्ष में लोक केरल सभा के छठे संस्करण के लिए एक भी रुपए का प्रावधान नहीं किया गया है। यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है, जब सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर अलग-अलग राय की चर्चा और कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि विपक्ष के नेता रहते हुए सतीशन ने जो रुख अपनाया था, उससे अब पीछे हट गए हैं।
लोक केरल सभा की परिकल्पना दुनियाभर में बसे प्रवासी मलयालियों को केरल के विकास और प्रवासी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। हालांकि, उस समय कांग्रेस नीत यूडीएफ विपक्ष ने तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा शुरू किए गए इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी थी।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा, "लोक केरल सभा को जारी नहीं रखने का फैसला यूडीएफ का राजनीतिक निर्णय है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।"
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि प्रवासी कल्याण या प्रवासी समुदाय से जुड़ी गतिविधियां बंद कर दी जाएंगी। लोक केरल सभा सचिवालय का कार्यालय पहले से मौजूद है और उसके प्रशासनिक खर्चों के लिए ही धन आवंटित किया गया है।
सरकार ने यह भी बताया कि नोरका के माध्यम से आयोजित कार्यक्रमों, बिजनेस लीडरशिप बैठकों और प्रवासी केरलवासियों से जुड़े अन्य कार्यक्रमों के लिए धन का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि प्रवासी भारतीयों का कल्याण उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
सरकार ने कहा कि यह राशि प्रवासी कल्याण से जुड़े प्रस्तावों को लागू करने की प्रारंभिक लागत पूरी करने के लिए भी निर्धारित की गई है।
पिछली सरकार के दौरान लोक केरल सभा एक बड़ा राजनीतिक विवाद का विषय बन गई थी। उस समय विपक्ष में रही यूडीएफ ने एलडीएफ पर इस कार्यक्रम में जनता के धन का फिजूल खर्च करने का आरोप लगाया था। वी.डी. सतीशन स्वयं भी इस मंच के मुखर आलोचकों में रहे और यूडीएफ ने इसके आधिकारिक सत्रों का बहिष्कार किया था।
लोक केरल सभा का पांचवां संस्करण जनवरी में तिरुवनंतपुरम में आयोजित हुआ था, जिसमें 125 देशों और भारत के 28 राज्यों से 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। यूडीएफ ने उस कार्यक्रम से भी दूरी बनाए रखी थी।
सरकार के ताजा स्पष्टीकरण से यह लगभग साफ हो गया है कि एलडीएफ सरकार के मॉडल पर लोक केरल सभा का छठा संस्करण आयोजित नहीं होगा। हालांकि, सरकार ने संकेत दिया है कि वह भविष्य में नोरका और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों के माध्यम से प्रवासी मलयालियों से जुड़ाव बनाए रखेगी।
--आईएएनएस
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