कोच्चि, 20 अगस्त (आईएएनएस)। केरल सरकार ने गुरुवार को उच्च न्यायालय को सूचित किया कि डीजीपी एस. श्रीजीत, आईपीएस के खिलाफ किसी सतर्कता जांच की आवश्यकता नहीं है। उन पर आरोप है कि उन्होंने विदेश जाने की अनुमति प्राप्त किए बिना दुबई की यात्रा की और कथित तौर पर उनसे जुड़े एक निजी उद्यम के उद्घाटन में भाग लिया।
गृह एवं सतर्कता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, मिन्हाज आलम, ने न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन के समक्ष यह निवेदन किया, जिन्होंने इस आरोप के बाद उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था कि सरकार ने इस मामले में पहले के अदालती आदेश का अनुपालन नहीं किया था।
अदालत सतर्कता विभाग की अनुपालन रिपोर्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें यह निष्कर्ष निकाला गया था कि श्रीजीत के खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे और परेशान करने वाले थे।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि श्रीजीत ने आकस्मिक अवकाश लिया और विदेश जाने की अनुमति प्राप्त किए बिना दुबई की यात्रा की।
उन पर यह भी आरोप लगाया गया था कि उन्होंने एक निजी उद्यम के उद्घाटन में भाग लिया था जो उनसे जुड़ा हुआ था।
इससे पहले उच्च न्यायालय ने शिकायत की जांच के निर्देश दिए थे।
इसके बाद, अतिरिक्त मुख्य सचिव ने याचिकाकर्ता को नोटिस जारी कर सुनवाई के लिए उपस्थित होने को कहा।
याचिकाकर्ता ने श्रीजीत की उपस्थिति में संयुक्त सुनवाई में भाग लेने की आवश्यकता पर आपत्ति जताते हुए इनकार कर दिया, जिनके खिलाफ आरोप लगाए गए थे।
याचिकाकर्ता ने अधिकारियों के समक्ष स्वतंत्र रूप से उपस्थित होने की इच्छा व्यक्त की थी।
बाद में उच्च न्यायालय ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि आगे की कार्यवाही करने से पहले श्रीजीत की अनुपस्थिति में उन्हें एक स्वतंत्र व्यक्तिगत सुनवाई प्रदान की जाए।
अदालत ने यह टिप्पणी की थी कि शिकायतकर्ता को उस व्यक्ति की उपस्थिति में सुनवाई में भाग लेने के लिए बाध्य करना, जिसके खिलाफ आरोप लगाए गए हैं, एक निष्पक्ष प्रक्रिया नहीं मानी जा सकती।
जब इस निर्देश के कथित उल्लंघन का मामला अदालत के समक्ष लाया गया तो अतिरिक्त मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा गया।
गुरुवार को अदालत के समक्ष पेश होते हुए मिन्हाज आलम ने कहा कि उन्होंने निर्देश का अनुपालन किया है और पाया है कि फिलहाल सतर्कता जांच की कोई आवश्यकता नहीं है।
इसके बाद न्यायालय ने कार्यवाही समाप्त कर दी, साथ ही याचिकाकर्ता को कानून के अनुसार उचित उपाय अपनाने की स्वतंत्रता भी दी।
न्यायमूर्ति बदरुद्दीन ने सरकारी अधिकारियों को अदालत के आदेशों का पालन करने के संबंध में कड़ी चेतावनी जारी की।
अदालत ने कहा कि अधिकारियों को जिम्मेदार होना चाहिए और चेतावनी दी कि बार-बार लापरवाही बरतने पर अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ सकता है और यहां तक कि अवमानना की कार्यवाही भी हो सकती है।
अदालत ने अधिकारियों को मौखिक रूप से यह निर्देश भी दिया कि जब भी उन्हें किसी और आदेश की आवश्यकता हो, वे क्लर्कों या चपरासियों को उच्च न्यायालय में भेजने के बजाय उचित याचिकाएं दाखिल करें और चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही पाए जाने पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
इस आदेश से याचिकाकर्ता को मामले को आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता मिलती है। हालांकि सरकार ने फिलहाल श्रीजीत के खिलाफ सतर्कता जांच की आवश्यकता से इनकार कर दिया है।
श्रीजीत को हाल ही में डीजीपी के पद पर पदोन्नत किया गया है।
--आईएएनएस
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