कोयंबटूर, 8 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले के सुलूर तालुक के अप्पानायक्कनपट्टी और करादिवावी गांवों के किसानों ने शनिवार को एक नजदीकी कास्ट आयरन यूनिट पर गंभीर आरोप लगाए। किसानों का कहना है कि यूनिट से निकलने वाले प्रदूषण के कारण फसलों, भूजल और लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और उनकी आजीविका संकट में पड़ गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कास्टिंग यूनिट से निकलने वाला धुआं और दुर्गंधयुक्त गैसें आसपास के वातावरण को प्रदूषित कर रही हैं। इससे कृषि क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है।
किसानों का कहना है कि प्रदूषण की समस्या विशेष रूप से रात के समय, रविवार और सरकारी छुट्टियों के दिनों में अधिक गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों के अनुसार, लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से बच्चों और वयस्कों में कई स्वास्थ्य समस्याएं सामने आई हैं। लोगों को आंखों, नाक और गले में जलन, लगातार खांसी, गले में दर्द समेत अन्य शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि इलाके में पशुओं की मौत के मामले भी सामने आए हैं।
स्थानीय किसान पी. रामकृष्णन ने कहा कि कथित प्रदूषण के कारण कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और भूजल भी दूषित हो गया है।
उन्होंने कहा, "जहरीले उत्सर्जन के कारण हमारी फसलें नष्ट हो रही हैं। भूजल भी प्रभावित हुआ है और हमें खुलकर सांस लेने में मुश्किल हो रही है। हमने कई बार सरकारी अधिकारियों को शिकायतें दी हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिला है।"
रामकृष्णन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ भूमि दलाल किसानों पर अपनी कृषि भूमि बेचने का दबाव बना रहे हैं, जिससे खेती पर निर्भर परिवारों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
एक अन्य किसान सुंदरा पांडियन, जो औद्योगिक इकाई से लगभग 200 मीटर दूर तीन एकड़ भूमि पर टमाटर और मिर्च की खेती करते हैं, उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में जब-जब भारी मात्रा में प्रदूषण फैला, उनकी फसलें बार-बार खराब हुईं।
उन्होंने बताया कि किसान प्रति एकड़ करीब 50 हजार रुपए खेती पर खर्च करते हैं, लेकिन बार-बार फसल खराब होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
सुंदरा पांडियन ने कहा, "जब भी हम शिकायत करते हैं तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राजस्व विभाग के अधिकारी क्षेत्र का दौरा करते हैं, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता।"
किसानों का आरोप है कि औद्योगिक प्रदूषण से कृषि भूमि पर मौजूद पेड़-पौधे भी प्रभावित हुए हैं, जिससे उनकी कीमत कम हुई है और खेती का काम बार-बार बाधित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्षों से विभिन्न सरकारी विभागों को शिकायतें देने के बावजूद उन्हें कोई स्थायी राहत नहीं मिली है।
अब प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों से मामले की विस्तृत जांच कराने और प्रदूषण पर तत्काल नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
किसानों ने भूजल को और अधिक दूषित होने से बचाने तथा अप्पानायक्कनपट्टी और करादिवावी गांवों के निवासियों के स्वास्थ्य, कृषि भूमि और आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
--आईएएनएस
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