वाराणसी, 30 जून (आईएएनएस)। काशी की सदियों पुरानी पारंपरिक गुलाबी मीनाकारी कला को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिली है। इस कला से तैयार होने वाले आभूषण अब सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में भी पसंद किए जा रहे हैं। बढ़ती वैश्विक मांग के चलते वाराणसी के कारीगरों को अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, इटली, इजराइल, कनाडा और दुबई समेत कई देशों से लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। इससे इस पारंपरिक शिल्प से जुड़े कारीगरों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी बढ़े हैं।
गुलाबी मीनाकारी अपने बारीक हस्तशिल्प और आकर्षक डिजाइन के लिए जानी जाती है। विदेशी ग्राहक अपनी पसंद और आधुनिक ट्रेंड के अनुसार डिजाइन भेजते हैं, जिनके आधार पर वाराणसी के शिल्पकार पारंपरिक तकनीक के साथ आधुनिक शैली के आभूषण तैयार करते हैं। गुणवत्ता और हाथ से बनी उत्कृष्ट कारीगरी के कारण इन उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार मांग बढ़ रही है।
नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित गुलाबी मीनाकारी कलाकार रमेश कुमार विश्वकर्मा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया कि उनका परिवार वर्ष 1982 से इस कला से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आज उनके परिवार की पांचवीं पीढ़ी इस विरासत को आगे बढ़ा रही है और नई पीढ़ी भी इस पारंपरिक कला को अपनाकर इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में लगी हुई है।
उन्होंने कहा कि काशी की गुलाबी मीनाकारी को वैश्विक पहचान मिलने का बड़ा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाता है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस कला से बने उपहार विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और विशिष्ट मेहमानों को भेंट किए। उन्होंने बताया कि अमेरिका की पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को भी उनके द्वारा तैयार किया गया गिफ्ट सेट भेंट किया गया था। इसके अलावा दुबई एक्सपो जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भी उनके बनाए आभूषण प्रदर्शित किए गए, जिससे इस कला को दुनियाभर में नई पहचान मिली।
रमेश कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना ने भी गुलाबी मीनाकारी को बड़ा बाजार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आभार जताते हुए कहा कि इस योजना के तहत मिले प्रोत्साहन से कारीगरों को नए अवसर मिले हैं और कारोबार में लगातार वृद्धि हो रही है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनके पास ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका, इजराइल, इटली, कनाडा और दुबई सहित कई देशों से नियमित रूप से ज्वेलरी के ऑर्डर आ रहे हैं। उनका कहना है कि विदेशी बाजार में काशी की गुलाबी मीनाकारी की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे न केवल वाराणसी की इस पारंपरिक कला को नई पहचान मिल रही है, बल्कि स्थानीय कारीगरों की आजीविका भी मजबूत हो रही है और काशी की सांस्कृतिक विरासत विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रही है।