बेंगलुरु, 15 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक भाजपा विधायक बसनगौड़ा आर पाटिल (यतनाल) ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की निविदाओं में कथित धांधली को लेकर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। यतनाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि बेंगलुरु सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड (बीएसडब्लूएमएल) ने नए लैंडफिल के लिए डोडबल्लापुर तालुक के गुंडालाहल्ली गांव में टेरा फार्म क्षेत्र सहित 100 एकड़ से अधिक भूमि की पहचान की थी। कांग्रेस सरकार ने बीबीएमपी की टेरा फर्मा बायोटेक्नोलॉजीज लिमिटेड से 38 एकड़ और 18 गुंटा भूमि को सशर्त मंजूरी दी थी।
उन्होंने कहा कि बीएसडब्लूएमएल ने प्रति एकड़ 1.50 करोड़ रुपए का मुआवजा तय किया था, जिसे वित्त विभाग ने अस्वीकार कर दिया था, क्योंकि यह 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत समिति द्वारा निर्धारित 1.35 करोड़ रुपए प्रति एकड़ की आधिकारिक कीमत का उल्लंघन था। हालांकि, वित्त विभाग की आपत्तियों के बावजूद, 13 नवंबर 2025 को हुई कैबिनेट बैठक में टेरा फर्मा को देय मुआवजे को संशोधित करके 1.57 करोड़ रुपए प्रति एकड़ कर दिया गया, जिससे राज्य के खजाने को नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा कि इस बात का प्रबल संदेह है कि मुआवजा बढ़ाने का उद्देश्य टेरा फर्मा के पूर्व निदेशक वीजी सिद्धार्थ के परिवार को लाभ पहुंचाना था। कैफे कॉफी डे के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ के पुत्र अमर्त्य हेगड़े का विवाह डीके शिवकुमार की सबसे बड़ी पुत्री ऐश्वर्या शिवकुमार से हुआ है। टेरा फर्मा के अधिकांश निदेशक कॉफी डे में भी निदेशक हैं या वरिष्ठ प्रबंधन पदों पर आसीन हैं। इससे स्पष्ट होता है कि डीके शिवकुमार के परिवार से संबंधित टेरा फर्मा के निदेशकों के मुआवजे में वृद्धि के लिए हुई कैबिनेट बैठक में हितों का टकराव था। डीके शिवकुमार ने भी इस बैठक में भाग लिया था और वित्त विभाग की आपत्तियों के बावजूद टेरा फर्मा के मुआवजे में वृद्धि के निर्णय को प्रभावित किया था।
भाजपा नेता ने कहा कि सरकार को मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी टेरा फर्मा को 1.57 करोड़ रुपए प्रति एकड़ का ठेका देने के मंत्रिमंडल के फैसले को तुरंत रद्द करना चाहिए। टेरा फर्मा का प्रदूषण नियंत्रण नियमों का उल्लंघन करने, जल निकायों को प्रदूषित करने और अपने कार्यक्षेत्र में लोगों को परेशानी पहुंचाने का कुख्यात इतिहास है। लोकायुक्त द्वारा इस मामले की गहन जांच की जानी चाहिए ताकि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित हो सके और हितों के टकराव में लिप्त लोगों को, उनकी वर्तमान स्थिति और पद की परवाह किए बिना, दंडित किया जा सके।