लखनऊ, 20 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने अयोध्या के श्रीराम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में जांच कर रही एसआईटी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब मामले में एफआईआर नहीं हुई तो जांच किसकी होगी।
आईएएनएस से बात करते हुए यूपी कांग्रेस चीफ अजय राय ने कहा कि भाजपा वाले पहले भगवान राम के नाम पर चंदा चोरी करते थे, अब अयोध्या में जमीन चोरी कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी दान करती है, इनकी तरह चढ़ावा चोरी नहीं करती है। भाजपा तो सिर्फ चंदा चोरी करती है।
उन्होंने कहा कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ हमारे जाने के बाद मंदिर पहुंचे। वह भले ही कार्रवाई और जांच की बात कर रहे हैं। लेकिन, एसआईटी कैसे कार्रवाई करेगी, जब एफआईआर ही दर्ज नहीं हुई है, तो असल में जांच किस बात की हो रही है? इससे साफ पता चलता है कि लोगों में कन्फ्यूजन पैदा करने और उन्हें गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। एसआईटी में अधिकारी विजय विश्वास पंत भी शामिल हैं, जो प्रयागराज में कमिश्नर थे, जब वहां भगदड़ मची थी। क्या सरकार ने विजय विश्वास पंत के खिलाफ कोई कार्रवाई की? जिस अधिकारी के खिलाफ जांच चल रही है, उसी को अब एसआईटी में शामिल कर लिया गया है। इससे साबित होता है कि एसआईटी सिर्फ कुछ लोगों को क्लीन चिट देने के लिए बनाई गई है। यह क्लीन चिट देने के अलावा कुछ नहीं करेगी।
नीट री-एग्जाम को लेकर अजय राय ने कहा कि यह क्या चल रहा है। आप सोच सकते हैं कि भुवनेश्वर की एक लड़की को देहरादून भेजा जा रहा है और नागपुर के एक छात्र को अबू धाबी भेजा जा रहा है। यह सरकार का सिस्टम है। परीक्षा आयोजित की जा रही है, और इसके लिए ऐसी पुख्ता व्यवस्था की गई है कि सेना की मदद ली जा रही है। इससे पता चलता है कि सरकार बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और देश के युवाओं के साथ पूरी तरह से धोखा कर रही है।
अजय राय ने लखनऊ में भी नीट री-एग्जाम को लेकर प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने देश के शिक्षा तंत्र और भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार पर प्रहार किया। अजय राय ने कहा कि वर्ष 2018 से लेकर 2026 तक लगातार नीट और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की भयावह त्रासदी के बावजूद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा नहीं दिया है, जिसकी कांग्रेस पार्टी पुरजोर मांग करती है। हाल ही में हुए नीट पेपर लीक से उपजे मानसिक तनाव के कारण देश के अलग-अलग राज्यों से 12 होनहार छात्रों ने जान गंवा दी है।
अजय राय ने बताया कि देश के पांच प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अभिभावकों का 3.5 लाख करोड़ रुपए खर्च होता है, जो देश के पांच प्रमुख मंत्रालयों के कुल बजट के बराबर है। इसके बावजूद देश का वर्तमान शिक्षा तंत्र एक 'रिजेक्शन सिस्टम' बन चुका है, जो एक हजार में से सिर्फ 12 छात्रों को नौकरी दे पाता है। देश के छात्रों और अभिभावकों की इसी पीड़ा को संसद से सड़क तक उठाने के लिए राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' अभियान की शुरुआत की है।
--आईएएनएस
डीकेएम/एबीएम





