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जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा प्रकरण: बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी जांच पर उठाए सवाल

जेएसएससी-सीजीएल

रांची, 17 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर राज्य सरकार और अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच नहीं की गई।

सीआईडी ने मुख्य रूप से उन अभ्यर्थियों के मामले पर ध्यान केंद्रित किया, जिन्हें परीक्षा से पहले नेपाल भेजकर परीक्षा के उत्तर रटवाए जाने की बात जांच के दौरान सामने आई थी। जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा वर्ष 2024 में आयोजित की गई थी। इस परीक्षा के माध्यम से दो हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हुई हैं। परीक्षा में प्रश्नपत्र और उत्तर पहले से उपलब्ध कराए जाने समेत कई तरह की अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए अभ्यर्थी इसकी जांच की मांग कर रहे हैं।

बाबूलाल मरांडी ने सोमवार को कहा कि सीआईडी जांच से संबंधित कई दस्तावेज अभ्यर्थियों के पास मौजूद हैं। इन दस्तावेजों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि जांच के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया था। उनके अनुसार, करीब 120 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पश्चिम बंगाल के आसनसोल के पास नियामतपुर स्थित एक होटल में ठहराया गया था।

मरांडी का आरोप है कि इन अभ्यर्थियों को एक साथ होटल में ठहराने का उद्देश्य उन्हें परीक्षा में पूछे जाने वाले संभावित प्रश्नों की पहले से तैयारी कराना था। उन्होंने कहा कि सीआईडी ने होटल का सत्यापन भी किया था और वहां जेएसएससी-सीजीएल के परीक्षार्थियों के ठहरने के साक्ष्य मिले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद नियामतपुर में अभ्यर्थियों के ठहरने और वहां उन्हें कथित तौर पर परीक्षा की तैयारी कराए जाने के आरोप की आगे प्रभावी जांच नहीं की गई।

उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और इस महत्वपूर्ण तथ्य को उच्च न्यायालय के समक्ष भी पूरी तरह नहीं रखा गया। मरांडी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल से जुड़े इन अभ्यर्थियों में से कई बाद में जेएसएससी-सीजीएल के जरिए सरकारी नौकरी पाने में सफल हुए।

उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को प्रश्नों की जानकारी उपलब्ध कराई गई थी तो यह पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने लंबित बिंदुओं पर जांच के लिए सीआईडी को अतिरिक्त समय भी दिया था। इसके बावजूद, उनकी जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल जाकर संबंधित अभ्यर्थियों और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच नहीं की गई।

मरांडी ने कहा कि जेएसएससी-सीजीएल मामले में यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसका सबसे बड़ा नुकसान उन युवाओं को हुआ है, जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी। उन्होंने कहा कि पूरे मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

--आईएएनएस

एसएनसी/एसके