जम्मू-कश्मीर में आरक्षण पर सियासत तेज, पीडीपी ने विधानसभा में लाया स्थगन प्रस्ताव

जम्मू-कश्मीर में आरक्षण पर सियासत तेज, पीडीपी का स्थगन प्रस्ताव
जम्मू-कश्मीर

श्रीनगर, 21 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर में आरक्षण व्यवस्था को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। पीडीपी ने विधानसभा में ओपन मेरिट और आरक्षण के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया है, जिसे नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने चर्चा के लायक नहीं समझा। इस पर पीडीपी नेता इल्तीजा मुफ्ती ने सरकार पर निशाना साधा है।

इल्तीजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट करते हुए लिखा, "पीडीपी ने मेरिट की हत्या और कश्मीर के युवाओं पर इसके बुरे असर पर तुरंत बहस के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया, फिर भी एनसी सरकार ने इसे विस्तार से बहस और चर्चा के लायक नहीं समझा। मेरिट के साथ संस्थागत भेदभाव और इस उदासीनता को खत्म करना होगा।"

दरअसल, पीडीपी विधायक वहीद उर रहमान पारा ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर नियम 56 के तहत स्थगन प्रस्ताव की सूचना दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा आरक्षण ढांचे के कारण ओपन मेरिट का हिस्सा 40 प्रतिशत से नीचे गिर गया है। इससे आरक्षित श्रेणियों से बाहर के उम्मीदवारों के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों तक समान पहुंच को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।

वहीद पारा ने अपने प्रस्ताव में कहा कि यह मुद्दा आरक्षण बनाम योग्यता का नहीं है, न ही यह कोई क्षेत्रीय या सांप्रदायिक मुद्दा है। यह सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और समान अवसर के बीच उचित संतुलन बनाए रखने से संबंधित है।

उन्होंने ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों में क्षेत्रीय असमानता का भी मुद्दा उठाया। प्रस्ताव में कहा गया कि सदन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश में जारी किए गए 26,558 ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों में से 24,545 जम्मू डिवीजन में और केवल 2,013 कश्मीर डिवीजन में जारी किए गए। इसी प्रकार, मुफ्त राशन योजना के लाभार्थियों में कश्मीर डिवीजन में 37,64,605 लाभार्थी हैं, जबकि जम्मू डिवीजन में 29,76,027 लाभार्थी हैं।

वहीद पारा ने मांग की है कि सदन इस बात की जांच करे कि क्या मौजूदा आय, संपत्ति और परिसंपत्ति-आधारित पात्रता शर्तें जम्मू-कश्मीर में परिवारों की वास्तविक आर्थिक कमजोरी को दर्शाती हैं।

उन्होंने सदन से पांच बिंदुओं पर तत्काल विचार करने का अनुरोध किया है। इनमें मौजूदा आरक्षण ढांचे का युक्तिकरण, अनारक्षित युवाओं पर इसके प्रभाव का आकलन, ईडब्ल्यूएस के कार्यान्वयन की समीक्षा, ईडब्ल्यूएस पात्रता मानदंडों की समीक्षा और आवधिक समीक्षा तंत्र की स्थापना शामिल है।

--आईएएनएस

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