मुंबई, 21 सितंबर (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने आईआईटी बॉम्बे के छात्र की आत्महत्या के मामले में बिना जांच किसी नतीजे पर पहुंचने से बचने की बात कही है। उन्होंने राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की मिमिक्री को लेकर उठे विवाद समेत कई मुद्दों पर भी प्रतिक्रिया दी।
आईआईटी बॉम्बे के छात्र की मौत पर सावंत ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और बिना जांच के किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा। छात्र ने आत्महत्या क्यों की और उसके सामने क्या समस्याएं थीं, इसका पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकता है। मामले में सीबीआई या एसआईटी, जिस भी एजेंसी से आवश्यकता हो, जांच कराई जानी चाहिए और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होनी चाहिए।
राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की मिमिक्री और भाजपा की ओर से माफी की मांग पर सावंत ने कहा कि मिमिक्री राहुल गांधी ने नहीं की थी। उन्होंने इसे कला और व्यंग्य का हिस्सा बताते हुए कहा कि राजनीतिक व्यंग्य समाज को आत्मचिंतन करने के मौके देते हैं। सावंत ने राज ठाकरे और बाला साहेब ठाकरे का उदाहरण देते हुए कहा कि नेताओं की मिमिक्री और उन पर व्यंग्य पहले भी होते रहे हैं।
सावंत ने भाजपा पर पलटवार करते हुए प्रधानमंत्री के पुराने राजनीतिक बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब विपक्षी नेताओं के लिए 'पप्पू', 'दीदी ओ दीदी' और दूसरी टिप्पणियां की जाती थीं, तब भी राजनीतिक व्यंग्य और कटाक्ष ही किए जा रहे थे। ऐसे में आज किसी मिमिक्री को लेकर नाराज होने के बजाय उसमें छिपे राजनीतिक संदेश को समझना चाहिए।
दिशा सालियान मामले से जुड़े सवाल पर सावंत ने आरोप लगाया कि पुराने मामलों को ऐसे समय उठाया जा रहा है, जब सरकार बेरोजगारी, किसानों की आत्महत्या, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर आलोचनाओं का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने धमकाने का आरोप लगाया है तो जिन लोगों के नाम लिए गए हैं, उनके बयान लिए जाने चाहिए और मामले में उचित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
चुनाव आयोग को लेकर भी सावंत ने तीखी टिप्पणी की और उस पर सत्ता पक्ष के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी से जुड़े चुनाव चिह्न और नाम के विवाद में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने कई महत्वपूर्ण तर्क रखे हैं। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से न्याय की उम्मीद है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति पर सावंत ने ममता बनर्जी का समर्थन करते हुए उन्हें हिम्मत वाली नेता बताया। उन्होंने वहां चुनावी उम्मीदवारों से जुड़े घटनाक्रम पर भी भाजपा को घेरा और सवाल किया कि क्या इस तरह की राजनीति को लोकतंत्र कहा जा सकता है।
इटली में सार्वजनिक स्थानों पर बुर्के को लेकर पूछे गए सवाल पर सावंत ने कहा कि दूसरे देश अपने यहां की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेते हैं और भारत को ऐसे मुद्दों के आधार पर अपने समाज में विवाद पैदा नहीं करना चाहिए। भारत में अनेक धर्मों और अलग-अलग आस्थाओं के लोग मिलकर रहते हैं और यही देश की विशेषता है।
गरबा में मुस्लिमों के प्रवेश को लेकर भाजपा विधायक की कथित शर्त पर सावंत ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि किसी व्यक्ति को यह तय करने का अधिकार किसने दिया कि कौन तिलक लगाएगा या कौन आरती करेगा? सावंत ने सर्वोच्च न्यायालय से ऐसी टिप्पणियों का स्वतः संज्ञान लेने की मांग की और कहा कि धर्म के नाम पर इस तरह की शर्तें लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
भाषा के मुद्दे पर सावंत ने कहा कि अपनी मातृभाषा पर गर्व होना स्वाभाविक है, लेकिन इसके लिए किसी दूसरी भाषा का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें मराठी होने पर गर्व है, लेकिन वह हिंदी का तिरस्कार नहीं करते। सावंत ने कहा कि देश में भाषा या धर्म के आधार पर नफरत पैदा करने वाली बातों को रोका जाना चाहिए।
--आईएएनएस
एएमटी/एबीएम






