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'स्वतंत्रता का अर्थ केवल अधिकारों का उपभोग करना नहीं': स्वतंत्रता दिवस पर गुजरात भाजपा अध्यक्ष

स्वतंत्रता का अर्थ केवल अधिकारों का उपभोग करना नहीं

गांधीनगर, 15 अगस्त (आईएएनएस)। गुजरात भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा ने शनिवार को कहा कि स्वतंत्रता को केवल अधिकारों के उपभोग के रूप में नहीं, बल्कि उन अधिकारों के जिम्मेदारीपूर्ण प्रयोग और राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने कर्तव्यों के अनुशासित निर्वहन के रूप में समझा जाना चाहिए।

80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गांधीनगर स्थित राज्य भाजपा मुख्यालय में ध्वजारोहण समारोह को संबोधित करते हुए विश्वकर्मा ने कहा कि संविधान ने प्रत्येक नागरिक को अधिकार प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें देश की एकता, अखंडता और प्रगति में योगदान देने का दायित्व भी सौंपा है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता का अर्थ केवल अधिकारों का उपभोग करना नहीं है, बल्कि उन अधिकारों का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करना और राष्ट्र एवं समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का अनुशासन, ईमानदारी और समर्पण के साथ निर्वहन करना है।

विश्वकर्मा ने आगे कहा कि स्वतंत्रता दिवस न केवल राष्ट्रीय गौरव का उत्सव मनाने का अवसर है, बल्कि उन लोगों को याद करने का भी अवसर है जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को मजबूत करने का भी अवसर है।

उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों, क्रांतिकारियों और अन्य महान व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

गुजरात के योगदान को याद करते हुए राज्य भाजपा अध्यक्ष ने महात्मा गांधी द्वारा सत्य और अहिंसा का संदेश जनता तक पहुंचाने में निभाई गई भूमिका, सरदार वल्लभभाई पटेल की संगठनात्मक क्षमता और राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, और श्यामजी कृष्ण वर्मा और सरदार सिंह राणा के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि आज भारत की प्रगति विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, रक्षा, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, डिजिटल प्रणालियों, स्टार्टअप, महिला सशक्तिकरण और अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में फैली हुई है। इस विकास यात्रा में प्रत्येक परिश्रमी नागरिक का योगदान रहा है।

'विकसित भारत' के राष्ट्रीय लक्ष्य का जिक्र करते हुए विश्वकर्मा ने कहा कि हमारी सामूहिक आकांक्षा है कि भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने पर एक विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध देश बने, जो विश्व का मार्गदर्शन करने में सक्षम हो।

उन्होंने नागरिकों से राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखने, एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने और ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।

उन्होंने लोगों से स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने, जल और बिजली का संरक्षण करने, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की रक्षा करने, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करने, स्वच्छता और शिक्षा को बढ़ावा देने और नशामुक्ति और सामाजिक सेवा में योगदान देने का भी आग्रह किया।

विश्वकर्मा ने 'राष्ट्र सर्वोपरि' की भावना से प्रेरित होकर सामूहिक प्रयासों का आह्वान करते हुए कहा कि हमारा जीवन देश के प्रति समर्पित होना चाहिए, हमारी प्रतिभा देश के प्रति समर्पित होनी चाहिए और हमारा परिश्रम देश के प्रति समर्पित होना चाहिए।

--आईएएनएस

एमएस/