गांधीनगर, 3 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात की आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक बड़े मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए 8 संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है।
एटीएस के मुताबिक, ये आरोपी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित कर रहे थे। उन्हें जैश-ए-मोहम्मद से जोड़ने का प्रयास कर रहे थे और गुजरात में संगठन का नेटवर्क तैयार करने में जुटे थे। एटीएस को मामले की जांच में पाकिस्तान से जुड़े हैंडलर्स के संपर्क, आतंकी साहित्य और डिजिटल सबूत भी मिले हैं। इस पूरे मामले पर गुजरात एटीएस के डीआईजी सुनील जोशी ने भी बड़ा खुलासा किया है।
गुजरात एटीएस को काफी समय से इनपुट मिल रहे थे कि राज्य में कुछ लोग प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इसके बाद एटीएस ने तकनीकी निगरानी, ह्यूमन इंटेलिजेंस और डिजिटल सर्विलांस के जरिए पूरे नेटवर्क पर नजर रखी। जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने की कोशिश कर रहे थे।
एटीएस की अलग-अलग टीमों ने बनासकांठा, मेहसाणा, पाटण, नवसारी और मध्य प्रदेश के देवास में एक साथ छापेमारी कर कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि आरोपियों ने गुजरात जैश-ए-मोहम्मद के नाम से एक नेटवर्क तैयार किया था। उनका मकसद ज्यादा से ज्यादा युवाओं को संगठन से जोड़ना और गुजरात में आतंकी विचारधारा का विस्तार करना था।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी पाकिस्तान में बैठे जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलर्स के संपर्क में थे। वे संगठन के प्रमुख मसूद अजहर के भाषण, किताबें और अन्य कट्टरपंथी सामग्री को गुजराती भाषा में अनुवाद कर लोगों तक पहुंचा रहे थे। इतना ही नहीं, नए सदस्यों की भर्ती के लिए ऑनलाइन अभियान भी चलाया जा रहा था।
छापेमारी के दौरान एटीएस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है। जांच में नॉर्डलॉकर ऐप से जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े 250 से अधिक दस्तावेज, फोटो, वीडियो और ऑडियो फाइलें मिलीं। इसके अलावा, पाकिस्तान में प्रकाशित किताबें, मसूद अजहर का साहित्य, संगठन से जुड़ने के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट लेटर और गुजराती में अनुवादित कट्टरपंथी सामग्री भी जब्त की गई है।
एटीएस की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपियों को आतंकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए करीब 3 लाख रुपए की फंडिंग मिली थी। एजेंसी अब इस फंडिंग के स्रोत, विदेशी कनेक्शन और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
मामले की जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस मॉड्यूल से जुड़े अन्य लोग गुजरात या देश के दूसरे राज्यों में सक्रिय तो नहीं हैं। गुजरात एटीएस ने सभी आठ आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम यानी यूएपीए की विभिन्न धाराओं और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। एटीएस का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
--आईएएनएस
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