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कोर्ट ने रिश्वत के मामले में पूर्व चीफ फायर ऑफिसर और सहयोगी की जमानत याचिकाएं खारिज की

कोर्ट

अहमदाबाद, 26 अगस्त (आईएएनएस)। अहमदाबाद की स्पेशल एंटी-करप्शन ब्यूरो (एसीबी) कोर्ट ने बुधवार को अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (एएमसी) के पूर्व चीफ फायर ऑफिसर अमित कुमार डोंगरे और फायर सेफ्टी क्लीयरेंस से जुड़े कथित रिश्वत मामले में बिचौलिये के तौर पर काम करने के आरोपी भावसिंह झाला की नियमित जमानत अर्जियां खारिज कर दीं।

अहमदाबाद में छह इमारतों के लिए फायर सेफ्टी नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) मंजूर करने के बदले 36,000 रुपये की कथित मांग और उसे स्वीकार करने के मामले में गुजरात एसीबी ने 7 अगस्त को इन दोनों को गिरफ्तार किया।

एसीबी के अनुसार, हर एनओसी के लिए कथित तौर पर 6,000 रुपये की मांग की गई थी जबकि आवेदन राज्य सरकार के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए जमा किए गए थे।

यह मामला तब सामने आया जब वडोदरा में एक फायर सेफ्टी ऑफिसर ने एसीबी से संपर्क किया और कथित मांग के बारे में शिकायत की।

शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो ने सरकारी गवाहों की मौजूदगी में अहमदाबाद के मेमनगर इलाके में विजय क्रॉस रोड्स पर यश इक्वा कॉम्प्लेक्स के पास जाल बिछाया।

आरोप है कि झाला को शिकायतकर्ता से 36,000 रुपये लेते हुए पकड़ा गया। इसके बाद एसीबी ने डोंगरे को गिरफ्तार किया। आरोप है कि झाला ने डोंगरे के कहने पर ही ऐसा किया था।

जांचकर्ताओं ने कहा कि ट्रैप के दौरान दोनों के बीच हुई टेलीफोन पर बातचीत से डोंगरे की कथित संलिप्तता और उस रकम के बारे में उनकी सहमति का पता चला।

एसीबी का कहना है कि झाला ने डोंगरे के कहने पर पैसे की मांग की और उसे स्वीकार किया। 47 वर्षीय डोंगरे को अक्टूबर 2024 में एएमसी का चीफ फायर ऑफिसर नियुक्त किया गया था और उसी साल दिसंबर में उन्होंने शहर की फायर सर्विस का कार्यभार संभाला था।

उनकी गिरफ्तारी के बाद नगर निकाय ने तत्काल प्रभाव से उनकी नियुक्ति रद्द कर दी। छह एनओसी से जुड़े कथित लेन-देन के अलावा जांच का दायरा भी बढ़ गया है।

एसीबी ने डोंगरे के कार्यकाल में जारी फायर सेफ्टी क्लीयरेंस के रिकॉर्ड मांगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित व्यवस्था सिर्फ छह आवेदनों तक ही सीमित थी या अन्य मामलों में भी लागू थी।

जांचकर्ता आरोपी से जुड़े वित्तीय और संचार रिकॉर्ड की भी जांच कर रहे हैं। नियमित जमानत अर्जियों के हालिया तौर पर खारिज होने का मतलब है कि दोनों आरोपी कानूनी कार्यवाही के दायरे में बने रहेंगे क्योंकि एसीबी कथित रिश्वतखोरी की अपनी जांच जारी रखेगी।

--आईएएनएस

एसएचके/पीएम