नई दिल्ली, 21 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। आयोग द्वारा विसंगतियों के कारण करीब 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इस लिस्ट में आम लोगों के साथ-साथ देश के कई बड़े दिग्गजों के नाम भी शामिल हैं। भाजपा ने इसे विपक्ष द्वारा एसआईआर को लेकर लगातार उठाए जा रहे सवाल पर करारा जवाब बताया और कहा कि यह साबित करता है कि एसआईआर में कोई भेदभाव नहीं हो रहा है और विपक्ष के आरोप बेबुनियाद हैं।
दरअसल, जिन लोगों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जैसे नाम भी शामिल हैं।
इसको लेकर भाजपा नेता संजय सरावगी ने कहा, "इससे विपक्ष के आरोप कि भाजपा एसआईआर प्रक्रिया के जरिए वोट चुरा रही है या विपक्ष के समर्थकों के नाम हटा रही है, गलत साबित हो गए हैं। हाई-प्रोफाइल लोगों को भी वही नोटिस मिल रहे हैं जो बाकी लोगों को मिलते हैं।"
उन्होंने कहा कि एसआईआर नोटिस मिलने का मतलब यह नहीं है कि नाम हटाया जा रहा है, बल्कि जिन्हें नोटिस मिलता है उन्हें जवाब देने के लिए एक महीने का समय दिया जाता है, जिसके बाद उनसे जरूरी दस्तावेज लिए जाते हैं। एसआईआर प्रक्रिया के तहत सभी को एक ही तरह का नोटिस मिलता है।
इस बीच भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा कि एसआईआर एक संवैधानिक प्रक्रिया है। कोई भी कानून के ऊपर नहीं होता। सभी को प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।
वहीं, पटना में जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा। चुनाव अधिकारियों द्वारा केजरीवाल को नोटिस जारी किए जाने पर उन्होंने कहा, "यह हैरानी की बात थी कि सिर्फ अरविंद केजरीवाल ने ही इतना हंगामा किया। ऐसा इसलिए है क्योंकि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व सेना प्रमुख, चुनाव आयुक्त, देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और कई अन्य प्रमुख लोगों को भी ऐसे ही नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, एसआईआर प्रक्रिया आम और प्रमुख लोगों के बीच कोई फर्क नहीं करती है।"
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