नई दिल्ली, 17 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एसएआरएससी टीम ने देहरादून, उत्तराखंड से एक ऐसे भगोड़े को गिरफ्तार किया है, जिसे 31 साल पुराने 1 करोड़ की फिरौती के लिए अपहरण के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अपराधी देहरादून निवासी अमित यादव (57) की गिरफ्तारी पर साल 2000 में 5 हजार का इनाम भी घोषित किया गया था।
यह मामला 1 करोड़ की फिरौती के लिए ऋषि सेठी के अपहरण से जुड़ा है। 12 सितंबर 1995 को शाम करीब 7:00 बजे ऋषि सेठी एम्स के डायरेक्टर के घर के पास अपनी कार में बैठे थे, तभी 3-4 लोगों ने जबरदस्ती उनको अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उनके साथ मारपीट की और आंखों पर पट्टी बांधी और उनकी ही कार में उनका अपहरण कर लिया। इसके बाद उन्हें एक अज्ञात जगह पर ले जाया गया और बंधक बनाकर रखा गया।
अपहरणकर्ताओं ने पीड़ित के परिवार से 1 करोड़ की फिरौती मांगी। आरोपियों के निर्देश पर मेरठ के होटल मयूर के कमरा नंबर 221 में 10 लाख की फिरौती की रकम रखी गई। 16 सितंबर 1995 को फिरौती की रकम लेने के बाद आरोपी अमित यादव को मेरठ में पुलिस ने पकड़ लिया। इसके पास से 10 लाख की पूरी फिरौती की रकम बरामद की गई।
इसके बाद पुलिस आरोपी अमित यादव के किराए के घर गाजियाबाद पहुंची, जहां पीड़ित ऋषि सेठी एक स्टोररूम के अंदर जंजीरों से बंधे पाए गए। उन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। अमित यादव के खिलाफ पटेल नगर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद 25 अगस्त 1999 को अमित दोषी ठहराया गया और 2.50 लाख के जुर्माने के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई गई। आरोपी अमित यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर की और उसे 15 जनवरी 2000 को एक महीने के लिए अंतरिम जमानत मिल गई। हालांकि, इसके बाद उसने सरेंडर नहीं किया और फरार हो गया।
इसके बाद, साल 2000 में उसकी गिरफ़्तारी पर 5,000 का इनाम घोषित किया गया और उसे 'घोषित अपराधी' भी करार दिया गया। अलग-अलग एजेंसियों की लगातार कोशिशों के बावजूद, वह लगभग 26 सालों तक गिरफ्तारी से बचता रहा।
लगातार पूछताछ के दौरान आरोपी अमित यादव ने बताया कि साल 2000 में फरार होने के बाद उसने गाजियाबाद में अपना किराए का घर छोड़ दिया और दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड में मौजूद सभी संपर्क तोड़ दिए। इसके बाद उसने उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के सैदपुर गांव में अपनी पुश्तैनी संपत्ति बेच दी।
गिरफ्तारी से बचने के लिए, वह पहले उत्तराखंड के ऋषिकेश चला गया, जहां वह लगातार अपने ठिकाने और रहने की जगह बदलता रहा। इसके बाद 2001 में वह उत्तराखंड के देहरादून चला गया, जहां उसने अपनी पहचान से जुड़ी जानकारी बदली और नई पहचान के साथ नई जिंदगी शुरू की। बाद में उसने कंस्ट्रक्शन का काम शुरू किया और देहरादून (उत्तराखंड) में बिल्डर बन गया।
--आईएएनएस
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