अमरावती, 26 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्र में नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंध्र प्रदेश में भी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया (डीएससी) में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) ने राज्य के शिक्षा मंत्री नारा लोकेश से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है। पार्टी ने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग भी दोहराई है।
वाईएसआरसीपी के एमएलसी पी. चंद्रशेखर रेड्डी ने रविवार को नेल्लोर में मीडिया से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि डिस्ट्रिक्ट सिलेक्शन कमेटी (डीएससी) के जरिए सरकारी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में अधिसूचना जारी होने से लेकर नियुक्तियों तक कई स्तरों पर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक पदों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है और डीएससी की अधिसूचना में भी स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि केवल टीईटी पास अभ्यर्थियों को ही भर्ती के लिए पात्र माना जाएगा। इसके बावजूद निर्धारित नियमों की अनदेखी करते हुए भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई, जो गंभीर विसंगति है।
चंद्रशेखर रेड्डी ने दावा किया कि डीएससी के तहत नौकरी पाने वाले कई अभ्यर्थी अब टीईटी परीक्षा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अदालत ने भी निर्देश दिया है कि शारीरिक शिक्षा निदेशकों (फिजिकल डायरेक्टर्स) को छोड़कर सभी शिक्षकों के लिए टीईटी योग्यता अनिवार्य है। ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि गठबंधन सरकार ने नियमों को दरकिनार कर बिना टीईटी योग्यता वाले उम्मीदवारों को नियुक्तियां दीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रश्नपत्र तैयार करने, उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन और भर्ती प्रक्रिया में भी कई तरह की अनियमितताएं हुई हैं। इन सभी मामलों की सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।
इससे पहले शनिवार रात वाईएसआरसीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने भी सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर पोस्ट कर नारा लोकेश के इस्तीफे की मांग की थी।
जगन मोहन रेड्डी ने लिखा, "नीट पेपर लीक मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा देकर जवाबदेही की मिसाल पेश की है। अब आंध्र प्रदेश में भी यही सवाल उठता है कि लगभग 3.5 लाख अभ्यर्थियों से जुड़ी डीएससी परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के बीच क्या शिक्षा मंत्री नारा लोकेश नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देंगे? या फिर मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू जवाबदेही के बजाय अपने बेटे का बचाव करेंगे?"
एमएलसी चंद्रशेखर रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह कमजोर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जगन मोहन रेड्डी सरकार के दौरान शुरू की गई 'नाडु-नेडु', अंग्रेजी माध्यम शिक्षा और अन्य सुधारात्मक योजनाओं को बंद कर दिया गया है, जिससे सरकार की शिक्षा के प्रति उदासीनता साफ दिखाई देती है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि 'तल्लिकी वंदनम' योजना को अपने मूल उद्देश्य के अनुरूप लागू नहीं किया जा रहा है और बजट के अनुरूप योजना को सीमित रखने के लिए 20 लाख से अधिक लाभार्थियों को इससे बाहर कर दिया गया है।