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नारी शक्ति वंदन का विरोध और 40 हजार का वादा, ये कैसा नारी सम्मान: श्रेयसी सिंह

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पटना, 26 अगस्त (आईएएनएस)। बिहार सरकार में मंत्री श्रेयसी सिंह ने भाजपा विधायक निशा सिंह को पार्टी के महिला मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि निशा सिंह के नेतृत्व में बिहार में महिला संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और बूथ स्तर तक महिला कार्यकर्ताओं को मजबूत किया जाएगा। वहीं, डिंपल यादव की ओर से महिलाओं के लिए 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' के तहत हर साल 40 हजार रुपए देने के वादे पर श्रेयसी सिंह ने विपक्ष की कथनी और करनी में अंतर होने का आरोप लगाया।

श्रेयसी सिंह ने कहा कि निशा सिंह ने भाजपा महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली है। इस अवसर पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, संगठन महामंत्री भीखू भाई समेत महिला मोर्चा की बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता मौजूद रहीं। निशा सिंह को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में प्रदेश से लेकर बूथ स्तर तक महिला कार्यकर्ताओं का नया संगठन और नई ऊर्जा के साथ खड़ा होगा। श्रेयसी सिंह ने उम्मीद जताई कि निशा सिंह महिलाओं के बीच संगठन को और मजबूत करने का काम करेंगी।

उन्होंने कहा कि बिहार में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता अलग-अलग बूथ और क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने के लिए काम करेंगी। महिला कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी से पार्टी के संगठनात्मक कार्यों और विचारधारा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। निशा सिंह के नेतृत्व में महिला मोर्चा को नई दिशा और ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। इसका प्रभाव केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी महिला संगठन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने महिला कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और पार्टी के कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने का आह्वान किया।

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव की ओर से महिलाओं के लिए 'स्त्री सम्मान समृद्धि योजना' के तहत हर साल 40 हजार रुपए देने के वादे को लेकर श्रेयसी सिंह ने विपक्ष की नीयत और पुराने रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से महिलाओं के हित में घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन जब महिलाओं को वास्तविक राजनीतिक और संवैधानिक अधिकार देने की बात आती है तो उनका रवैया अलग दिखाई देता है।

श्रेयसी सिंह ने इसी संदर्भ में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकार देने की दिशा में कदम उठाया गया है, लेकिन विपक्ष ने इसका समर्थन नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष जब सत्ता पक्ष की ओर से कोई काम किया जाता है तो उसका विरोध करता है, लेकिन बाद में उसी तरह की योजनाओं और मुद्दों को लेकर घोषणाएं करता है। विपक्ष की राजनीति में कथनी और करनी का अंतर दिखाई देता है। यदि वास्तव में विपक्ष महिलाओं के अधिकारों और सशक्तिकरण के पक्ष में है, तो उसे महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने वाली पहल का भी समर्थन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि केवल आर्थिक सहायता की घोषणा करना ही महिला सशक्तिकरण का पूरा अर्थ नहीं है। महिलाओं को राजनीतिक, सामाजिक और संवैधानिक अधिकार देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विपक्ष को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह महिलाओं के लिए वास्तव में किस तरह की राजनीति और विचारधारा लेकर चल रहा है। उनके मुताबिक, एक तरफ महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात करना और दूसरी तरफ महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर अलग रुख अपनाना विरोधाभास को दर्शाता है।

--आईएएनएस

पीएसके