भोपाल की यूनियन कार्बाइड प्रभावित बस्तियों के 70 प्रतिशत पानी के नमूने दूषित

भोपाल की यूनियन कार्बाइड प्रभावित बस्तियों के 70 प्रतिशत पानी के नमूने दूषित

भोपाल, 31 जुलाई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की गैस प्रभावित बस्तियों में रहने वालों को दूषित पानी मिल रहा है। पीड़ितों की लड़ाई लड़ने वाले संगठनों का दावा है कि यहां के पानी के नमूने में 70 फीसदी नमूने दूषित पाए गए हैं।

गैस पीड़ितों की लड़ाई लड़ने वाले संगठनों संवाददाता सम्मेलन में दावा किया है कि भोपाल नगर निगम पर परित्यक्त कार्बाइड कारखाने के आसपास के मोहल्लों में सीवेज से दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है। नेताओं ने इन इलाकों में सप्लाई हो रहे पीने के पानी की जांच पर एक रिपोर्ट पेश की। इसमें सामने आया कि जांचे गए पानी के करीब 70 प्रतिशत नमूनों में मल के बैक्टीरिया (फीकल कोलीफॉर्म) पाए गए।

भोपाल गैस पीड़ित महिला पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान ने कहा, हमने इस महीने 30 समुदायों के नलों से 63 पानी के नमूने लिए, जिनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफार्म की पुष्टि हुई। यह स्पष्ट प्रमाण है कि 30 में से 19 समुदायों को दिया जा रहा पेयजल मल से दूषित है।

उन्होंने बताया कि अपर लेक (बड़ा तालाब) से आपूर्ति किए गए पानी के 90 प्रतिशत नमूने और कोलार डैम से आपूर्ति किए गए पानी के 25 प्रतिशत नमूने दूषित पाए गए।

भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने बताया है कि परित्यक्त यूनियन कार्बाइड कारखाने से सटे समुदायों के निवासी मल-दूषित पानी पीने से दूषित जल से होनी वाली बीमारियों और तकलीफों की चपेट में हैं। पूरे-पूरे परिवार दस्त और उल्टी की शिकायत कर रहे हैं, और निजी क्लीनिकों में टाइफाइड के बहुत अधिक मामले सामने आ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने ये माना की यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की वजह से यहां के रहवासियों का पानी जहरीले रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित है और इन्ही जहरीले तत्वों से बचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने और पीने का साफ पानी उपलब्ध कराने का आदेश दिया था।

भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव के अनुसार, अगस्त 2018 में पाइपलाइन के पानी में मल-संदूषण की शिकायतों के जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को इस क्षेत्र में सीवेज लाइनें बिछाने और उचित जल-निकासी (ड्रेनेज) सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। बीएमसी ने तीन महीने में यह काम पूरा करने का वादा किया था, लेकिन पिछले आठ वर्षों में इस दिशा में एक भी कदम नहीं उठाया गया है।

भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने मल-दूषित पेयजल की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा, सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन कर निवासियों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाले अधिकारियों को दंडित किया जाए।

--आईएएनएस

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