कोलकाता, 15 जून (आईएएनएस)। नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के फेसबुक पोस्ट शेयर करने के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। तृणमूल कांग्रेस पार्टी के 20 बागी सांसदों के साथ एनसीपीआई पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी संसदीय ताकत बनकर उभरी है। इसके बाद कांग्रेस ने उसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि अब स्थिति पहले से ज्यादा विकट हो चुकी है। पहले सिर्फ बांग्लादेश के नागरिक ही भारत में अवैध रूप से दाखिल होते थे, लेकिन अब राजनीतिक दल भी हो रहे हैं।
अधीर रंजन चौधरी ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में पश्चिम बंगाल में टीएमसी के बागी नेताओं के त्रिपुरा की एनसीपीआई में शामिल होने का जिक्र करते हुए दावा किया कि यह पार्टी मूल रूप से बांग्लादेश की है, जिसका उदय ही शेख हसीना के खिलाफ मोर्चा खोलने के मकसद से हुआ था। इस पार्टी ने सुनियोजित तरीके से हिंदुस्तान की सरजमीं पर अपनी दस्तक दी और आज यह त्रिपुरा में अपनी जगह बना चुकी है। अब इसी पार्टी में टीएमसी के कई बागी नेता भी शामिल हुए हैं।
उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मैं सलाह देना चाहूंगा कि वो इस पार्टी की जांच करें। इस पार्टी की जरूरी इसलिए जरूरी हो जाती है, क्योंकि बांग्लादेश के नागरिकों के इतर वहां के राजनीतिक दल भी अवैध रूप से यहां पर दाखिल हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में राजनीतिक दलों को चिन्हित करना मौजूदा सरकार के लिए जरूरी हो जाता है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में केंद्र सरकार ने यहां पर अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला शुरू किया हुआ है। इस कार्रवाई के तहत यहां पर अवैध रूप से रह रहे लोगों को चिन्हित करके उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, ताकि हमारे संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव नहीं बढ़े। अब जिस तरह से त्रिपुरा की इस पार्टी का मामला सामने आया है, जिसका जन्म मूल रूप से बांग्लादेश में हुआ है, इस तरह की पार्टियों के खिलाफ भी कार्रवाई जरूरी हो जाती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मामले में गंभीरता बरतते हुए ऐसे पार्टियों को चिन्हित करके उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी, तभी आगे चलकर स्थिति साफ हो पाएगी।
साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नेशनल सिटीजन पार्टी में जितने भी लोग शामिल हुए हैं, वो सभी मूल रूप से दगाबाजी ही करते हुए आए हैं। ये सभी लोग दूसरी पार्टियों में शामिल होकर बंगाल की छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।