'अलीबाबा' से 'खिलाड़ियों का खिलाड़ी' तक… कुछ ऐसा रहा बॉलीवुड के हिटमेकर उमेश मेहरा का सफर

'अलीबाबा' से 'खिलाड़ियों का खिलाड़ी' तक… कुछ ऐसा रहा बॉलीवुड के हिटमेकर उमेश मेहरा का सफर

मुंबई, 5 अगस्त (आईएएनएस)। 6 अगस्त 1953 को जन्मे उमेश मेहरा सिर्फ एक सफल निर्देशक ही नहीं बल्कि मशहूर निर्माता एफ.सी. मेहरा के बेटे भी हैं। हालांकि, उन्होंने अपनी पहचान सिर्फ पिता के नाम से नहीं बनाई बल्कि अपने हुनर और फिल्मों के दम पर बॉलीवुड में अलग मुकाम हासिल किया। उमेश मेहरा का नाम उन फिल्म निर्देशकों में लिया जाता है, जिन्होंने 80 और 90 के दशक में बॉलीवुड को कई यादगार और सुपरहिट फिल्में दीं।

बचपन से ही फिल्मों का माहौल उनके आसपास था। उनके पिता एफ.सी. मेहरा हिंदी सिनेमा के बड़े निर्माताओं में गिने जाते थे। ऐसे में उमेश का फिल्मों की तरफ आकर्षित होना स्वाभाविक था। उन्होंने एच.आर. कॉलेज से कॉमर्स की पढ़ाई की लेकिन दिल हमेशा फिल्मी दुनिया में ही लगा रहा। अभिनय और फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखने के लिए उन्होंने जागीरदार की एक्टिंग अकादमी में दाखिला लिया। इसके बाद उन्हें शम्मी कपूर जैसे दिग्गज अभिनेता-निर्देशक के साथ 'मनोरंजन' और 'बंडलबाज' में सहायक निर्देशक के रूप में काम करने का मौका मिला। शम्मी कपूर को वह हमेशा अपना गुरु और पिता तुल्य मानते रहे।

उमेश मेहरा को बतौर निर्देशक पहला बड़ा मौका फिल्म 'हमारे तुम्हारे' से मिला। इस फिल्म में संजीव कुमार और राखी जैसे बड़े कलाकार थे। लेकिन जिस फिल्म ने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई, वह थी 'अलीबाबा और 40 चोर'। साल 1980 में रिलीज हुई यह भारत और सोवियत संघ की संयुक्त फिल्म थी। धर्मेंद्र, हेमा मालिनी और जीनत अमान जैसे सितारों से सजी यह फिल्म उस दौर की सबसे भव्य कॉस्ट्यूम ड्रामा फिल्मों में गिनी गई और बॉक्स ऑफिस पर भी सफल रही।

इसके बाद उन्होंने लगातार कई सफल फिल्मों का निर्देशन किया। मिथुन चक्रवर्ती के साथ 'अशांति', 'मुजरिम', 'गुरु' और 'यार गद्दार' जैसी फिल्मों ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। वहीं 'सोहनी महिवाल' जैसी रोमांटिक फिल्म आज भी अपने संगीत और कहानी के लिए याद की जाती है।

जब अक्षय कुमार बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब उमेश मेहरा ने उन्हें बड़ा मौका दिया। उन्होंने 'सबसे बड़ा खिलाड़ी', 'खिलाड़ियों का खिलाड़ी' और 'इंटरनेशनल खिलाड़ी' जैसी तीन बड़ी फिल्मों का निर्देशन किया। इन फिल्मों ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया, बल्कि अक्षय कुमार को 'खिलाड़ी' इमेज दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। खास तौर पर 'खिलाड़ियों का खिलाड़ी' आज भी एक्शन फिल्मों की क्लासिक फिल्मों में गिनी जाती है।

उमेश मेहरा ने सिर्फ नए कलाकारों को मौका ही नहीं दिया, बल्कि कई दिग्गज सितारों के साथ भी काम किया। साल 1998 में उन्होंने हिंदी सिनेमा के महान अभिनेता दिलीप कुमार को फिल्म 'किला' में निर्देशित किया। यह दिलीप कुमार के करियर की आखिरी फिल्म थी।

साल 2002 में 'ये मोहब्बत है' के बाद उमेश मेहरा ने फिल्मों से दूरी बना ली और टेलीविजन की दुनिया में कदम रखा। अपने पारिवारिक बैनर ईगल फिल्म्स के जरिए उन्होंने कई लोकप्रिय टीवी शोज का निर्माण किया। 'ऑफिस ऑफिस' और 'चला मुसद्दी - ऑफिस ऑफिस' जैसे धारावाहिक दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए और आज भी भारतीय टेलीविजन के यादगार कॉमेडी शोज़ में गिने जाते हैं।

--आईएएनएस

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