आईएमए ने नीट-यूजी काउंसलिंग सुधार और एंटी-पेपर लीक कानून का किया स्वागत

आईएमए ने नीट-यूजी काउंसलिंग सुधार और एंटी-पेपर लीक कानून का किया स्वागत

नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार नायक ने नीट-यूजी काउंसलिंग में किए गए सुधार, एंटी-पेपर लीक बिल, पेपर लीक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश और देश में बढ़ रहे एच1एन1 (इन्फ्लूएंजा) के मामलों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नई काउंसलिंग व्यवस्था और पेपर लीक रोकने के लिए लाए गए कानून का स्वागत करते हुए कहा कि इससे छात्रों को पारदर्शी और तेज़ प्रक्रिया का लाभ मिलेगा। वहीं, मौसमी फ्लू को लेकर लोगों से घबराने के बजाय डॉक्टर की सलाह पर ही इलाज कराने की अपील की।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में डॉ. अनिल कुमार नायक ने कहा कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा द्वारा नीट-यूजी काउंसलिंग को अधिक पारदर्शी, मेरिट आधारित, तकनीक-सक्षम और छात्र हितैषी बनाने की दिशा में उठाया गया कदम स्वागत योग्य है। देशभर के मेडिकल कॉलेजों में ऑल इंडिया कोटा, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज (डीजीएचएस) और राज्य कोटा की सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया अब अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होगी। नई तकनीकी व्यवस्था के जरिए छात्र ऑनलाइन ही सीटों की स्थिति, अपनी पसंद और काउंसलिंग प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से देख सकेंगे। इससे प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों को बार-बार जानकारी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

डॉ. नायक के अनुसार, अब तक मेडिकल एडमिशन की पूरी प्रक्रिया में पांच से छह महीने का समय लग जाता था, लेकिन नई प्रणाली लागू होने के बाद इसे एक से दो महीने के भीतर पूरा किया जा सकेगा। सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि सिस्टम को हैकिंग और दुरुपयोग से सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे छात्रों को समय पर प्रवेश मिल सकेगा। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्र सरकार को बधाई देते हुए कहा कि आईएमए इस व्यवस्था का पूर्ण समर्थन करता है।

एंटी-पेपर लीक बिल और इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी की चेतावनी पर डॉ. नायक ने कहा कि सरकार द्वारा लाया गया सख्त कानून स्वागत योग्य है। प्रधानमंत्री मोदी की मंशा स्पष्ट है कि देश का कोई भी छात्र पेपर लीक जैसी घटनाओं का शिकार न बने। यदि कानून प्रभावी ढंग से लागू हुआ तो पेपर लीक करने की साजिश रचने वाले लोग अपराध करने से पहले कई बार सोचेंगे। सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से ऐसे मामलों में शीघ्र सुनवाई की बात कही है, जिससे दोषियों को जल्दी सजा मिल सकेगी।

डॉ. नायक ने कहा कि इस कानून के दायरे में केवल पेपर लीक करने वाले ही नहीं, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार करने वाली एजेंसियां और पूरी प्रक्रिया से जुड़े जिम्मेदार लोगों को भी शामिल किया गया है। संसद के दोनों सदनों में चर्चा के बाद कानून पारित हुआ है, इसलिए उन्हें इसकी प्रभावशीलता पर विश्वास है। आने वाले समय में भारत में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा। छात्रों और अभिभावकों के लिए संदेश देते हुए डॉ. नायक ने कहा कि जीवन में कभी-कभी कठिन और निराशाजनक घटनाएं होती हैं, लेकिन उनसे टूटने के बजाय आगे बढ़ने का संकल्प लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि छात्रों को अपना मनोबल मजबूत रखना चाहिए और किसी भी असफलता या कठिन परिस्थिति से डरना नहीं चाहिए। अवसर कभी समाप्त नहीं होते, बल्कि समय के साथ नए अवसर लगातार सामने आते रहते हैं। उन्होंने युवाओं से अपने लक् को लेकर लगातार मेहनत करते रहने की अपील की।

देश में बढ़ रहे एच1एन1 इन्फ्लूएंजा और दिल्ली-एनसीआर सहित विभिन्न क्षेत्रों में मौसमी फ्लू के मामलों पर डॉ. नायक ने कहा कि यह केवल दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसून और पोस्ट-मानसून सीजन में पूरे देश में मौसमी वायरल संक्रमण जैसे फ्लू, डेंगू और चिकनगुनिया के मामले बढ़ते हैं। अधिकांश मामलों में यह संक्रमण सेल्फ-लिमिटेड होता है और उचित देखभाल से मरीज ठीक हो जाते हैं। यदि किसी व्यक्ति को बुखार, खांसी, जुकाम या फ्लू जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे घबराने के बजाय अपने फैमिली फिजिशियन या योग्य डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

डॉ. नायक ने लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लगभग 90 प्रतिशत वायरल बीमारियों में एंटीबायोटिक की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन लोग घबराकर मेडिकल स्टोर से स्वयं दवाएं खरीद लेते हैं, जिससे एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी गंभीर समस्या बढ़ रही है। इन्फ्लूएंजा का इलाज मुख्य रूप से लक्षणों के आधार पर किया जाता है और डॉक्टर की सलाह से दवा लेने पर बीमारी नियंत्रित हो जाती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार की दवा, विशेषकर एंटीबायोटिक, केवल चिकित्सकीय परामर्श और डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन पर ही लें, ताकि भविष्य में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता जैसी गंभीर समस्याओं से बचा जा सके।

--आईएएनएस

पीएसके