नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।
22 अगस्त 2026 (शनिवार) को श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि तड़के 2:00 बजे तक है। इसके बाद एकादशी तिथि लग जाएगी। इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु और शनिदेव की पूजा की जानी चाहिए, क्योंकि शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है।
शनिवार सुबह 6:09 बजे सूर्योदय और शाम 6:50 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, दोपहर 2:51 बजे चंद्रोदय और रात 1:27 बजे चंद्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 22 अगस्त 2026 को सूर्य मघा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा दोपहर 2:50 बजे तक ज्येष्ठा नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद मूल नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
शनिवार को हर्षण योग नहीं रहेगा, बल्कि इस दिन विष्कम्भ योग है। इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:04 से 12:55 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है। अमृत काल सुबह 4:55 से 6:43 बजे तक रहेगा।
वहीं, राहुकाल सुबह 9:19 बजे से दोपहर 12:30 बजे और गुलिक काल सुबह 6:09 से 7:44 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यमगंड काल दोपहर 2:04 से 3:39 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए, क्योंकि इन्हें अशुभ समय माना जाता है।
शनिवार को इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित रहेगा। पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना अनिवार्य हो तो कुछ विशेष ज्योतिषीय उपायों को अपनाकर प्रस्थान किया जा सकता है।
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