दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। काठमांडू घाटी में नेपाल के सेंट्रल जू (चिड़ियाघर) में एक दर्जन से ज्यादा पक्षियों और जानवरों में बर्ड फ्लू के मामले पाए गए। इस घटना के बाद सेंट्रल जू को शुक्रवार से अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है।
चिड़ियाघर में अलग-अलग प्रकार वन्यजीव रहते हैं, जो इसे खूबसूरत बनाते हैं। ऐसे में यह स्थान घाटी में आने वाले पर्यटकों, छात्रों और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षणों में से एक है।
शुक्रवार देर रात एक नोटिस जारी करते हुए, सेंट्रल जू के अधिकारियों ने कहा कि चिड़ियाघर परिसर के अंदर पक्षियों और जानवरों के बीच एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) संक्रमण का पता चलने के बाद आम जनता और आगंतुकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा के लिए अगली सूचना तक सुविधा बंद कर दी गई है। सेंट्रल चिड़ियाघर के संचालन के लिए नेशनल ट्रस्ट फॉर नेचर कंजर्वेशन जिम्मेदार है।
हालांकि इंसानों से इंसानों में बर्ड फ्लू का फैलना बहुत कम होता है, लेकिन ऐसे मामले सामने आए हैं जहां संक्रमित पक्षियों के रोजाना संपर्क में रहने वाले लोगों इस वायरस के चपेट में आ गए।
सेंट्रल जू के सूचना अधिकारी गणेश कोइराला ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस को बताया कि बर्ड फ्लू का पता चलने के बाद चिड़ियाघर को डिसइंफेक्शन के लिए बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा, "चिड़ियाघर के कम से कम एक हफ्ते तक बंद रहने की उम्मीद है और खतरे के आधार पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है।"
उनके अनुसार, एक दर्जन से ज्यादा जानवर, ज्यादातर पक्षी, साथ ही कुछ मैमल्स जैसे चित्तीदार जंगली बिल्ली, बिल्लियां और सिवेट, वायरस से संक्रमित पाए गए हैं।
हालांकि, चिड़ियाघर के अधिकारियों ने पोल्ट्री फार्म के उलट, पक्षियों को बड़े पैमाने पर मारने का कोई प्लान नहीं बनाया है।
इस साल 18 मार्च को कोशी प्रांत के पूर्वी मोरांग जिले में पहली बार बीमारी का पता चलने के बाद हाल के दिनों में काठमांडू घाटी में बीमारी फैलने से चिड़ियाघर में रखे गए जानवर संक्रमित हो गए थे।
डिपार्टमेंट ऑफ लाइवस्टॉक सर्विसेज के अनुसार, तब से 10 जिलों में कम से कम 55 पोल्ट्री फॉर्म प्रभावित हुए हैं, जिससे अधिकारियों को कुल 479,156 पक्षियों और 694,193 अंडों को नष्ट करना पड़ा। इसी तरह, 182,775 किलोग्रम जानवरों का चारा भी नष्ट हो गया।
वन विभाग ने कहा, “कोसी क्षेत्र के मोरंग जिले में बीमारी कंट्रोल में लगती है। हालांकि, काठमांडू वैली में प्रभावित खेतों की बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि बीमारी फैल रही है और मजबूत जैव-सुरक्षा, निगरानी और हस्तक्षेप के प्रति प्रतिक्रिया की जरूरत है।”
--आईएएनएस
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