नई दिल्ली, 20 अगस्त (आईएएनएस)। क्या नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का शेयर अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेड कर सकता है? यह सवाल उठने लगा है, क्योंकि रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि एनएसई 'परमिटिड टू ट्रेड' (पीटीटी) रूट के जरिए अपने ही शेयर को एक्सचेंज पर ट्रेड कराने की योजना पर काम कर रहा है, जबकि इसकी मूल लिस्टिंग बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर होगी।
एडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) अपने ही शेयर को प्लेटफॉर्म पर ट्रेड कराने की संभावनाओं को तलाश रहा है, हालांकि, इसकी मूल लिस्टिंग बीएसई पर होगी।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि मौजूदा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत स्टॉक एक्सचेंजों को सेल्फ-लिस्टिंग की इजाजत नहीं है। अगर एक्सचेंज को अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग के लिए अपने शेयर ट्रेड करने हैं, तो उसे पहले भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के मंजूरी लेनी होगी।
हालांकि, पीटीटी फ्रेमवर्क एक्सचेंज पर औपचारिक रूप से लिस्ट हुए बिना एनएसई पर सिक्योरिटीज की ट्रेडिंग की अनुमति देता है। इस प्रणाली के तहत शामिल कंपनियां अपने प्राइमरी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड बनी रहती हैं, जबकि ट्रेड दूसरे एक्सचेंज पर कर सकती हैं।
इससे पहले मई में, एनएसई ने अपने मेनबोर्ड सेगमेंट में पीटीटी कैटेगरी के तहत शामिल सिक्योरिटीज के लिए एफएक्यू जारी किए थे और फ्रेमवर्क को स्पष्ट किया था। इसके तहत, कंपनियों को एनएसई के साथ अलग से लिस्टिंग एग्रीमेंट करने की जरूरत नहीं होती है, जबकि प्राइमरी एक्सचेंज को दी गई मौजूदा जानकारी को ही काफी माना जाता है।
हालांकि, पीटीटी सिक्योरिटीज में ट्रेडिंग एनएसई की निगरानी और रेगुलेटरी सिस्टम के दायरे में ही रहेगी।
पीटीटी के तहत शामिल कंपनियां बाद में एक्सचेंज पर पूरी तरह लिस्टिंग के लिए आवेदन कर सकती हैं, बशर्ते वे जरूरी शर्तों को पूरा करती हों; साथ ही, एक्सचेंज के पास ट्रेडिंग को सस्पेंड करने या उस पर रोक लगाने का अधिकार भी होगा।
अगर एनएसई के लिए मंजूरी मिल जाती है, तो इसका मतलब होगा कि एक्सचेंज औपचारिक रूप से बीएसई पर लिस्टेड रहेगा, जबकि इसके शेयरों की ट्रेडिंग एनएसई पर भी हो सकेगी, जिससे निवेशकों को ट्रेडिंग के लिए एक और जगह मिल जाएगी।
यह घटनाक्रम एनएसई के प्रस्तावित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) से पहले सामने आया है। एक्सचेंज ने जून में सेबी के पास आईपीओ के लिए अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था, जिसमें 14.89 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री का प्रस्ताव शामिल है।
एनएसई की लिस्टिंग की योजना सबसे पहले 2016 में शुरू हुई थी, लेकिन को-लोकेशन विवाद से जुड़ी रेगुलेटरी जांच के कारण इसमें देरी हुई। फिलहाल एनएसई की आईपीओ लाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
--आईएएनएस
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