Advertisement banner

सरकारी योजनाओं के दम पर भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की रफ्तार मजबूत, 10.88 प्रतिशत सीएजीआर से बढ़ रहा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर

सरकारी

नई दिल्ली, 15 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्र सरकार की उत्पादन, आत्मनिर्भरता और औद्योगिक विकास से जुड़ी नीतियों के चलते भारत का विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार बनकर उभरा है। सरकार द्वारा शनिवार को जारी एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, उत्पादन, निर्यात और निवेश में लगातार वृद्धि के कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने हाल के वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। रक्षा उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी भारत ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।

फैक्टशीट के अनुसार, भारत का विनिर्माण क्षेत्र वर्तमान में देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 16 से 17 प्रतिशत का योगदान देता है और इससे 2.7 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। स्थिर कीमतों पर इस क्षेत्र की सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) वृद्धि दर का चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) 10.88 प्रतिशत रहा है, जो इसकी मजबूत विकास क्षमता को दर्शाता है।

सरकार ने बताया कि जुलाई 2026 में भारत का माल निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) बढ़कर 44.24 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 36.98 अरब डॉलर था। वहीं जून 2026 में विनिर्माण उत्पादन में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो औद्योगिक गतिविधियों में लगातार सुधार का संकेत है।

रक्षा क्षेत्र में भारत ने पिछले एक दशक में उल्लेखनीय बदलाव देखा है। आत्मनिर्भरता पर जोर, लक्षित निवेश और नीतिगत सुधारों के परिणामस्वरूप स्वदेशी रक्षा उत्पादन का मूल्य वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। यह पिछले वित्त वर्ष के 1,54,071 करोड़ रुपए की तुलना में 15.6 प्रतिशत अधिक है। तुलना करें तो वर्ष 2014-15 में देश का रक्षा उत्पादन केवल 46,429 करोड़ रुपए था।

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र ने भी तेज गति से विस्तार किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 11.32 लाख करोड़ रुपए की तुलना में 15.8 प्रतिशत अधिक है। मोबाइल फोन विनिर्माण और निर्यात में भी बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। मोबाइल फोन निर्यात बढ़कर 2.59 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जिससे भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।

भारत अब सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार के अनुसार, सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 1.0 के तहत जुलाई 2026 तक 1.64 लाख करोड़ रुपए से अधिक निवेश वाली 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक एकीकृत गैलियम नाइट्राइड माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं।

इसके अलावा, बड़े पैमाने के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण (एलएसईएम) के लिए लागू प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना ने मोबाइल निर्माण इकोसिस्टम में करीब 96,000 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया है। सरकार का मानना है कि इन पहलों से भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने में मदद मिलेगी।

फैक्टशीट में यह भी कहा गया है कि फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में उत्पादन, नवाचार और निर्यात में लगातार वृद्धि ने भारत की पहचान एक विश्वसनीय वैश्विक दवा आपूर्तिकर्ता के रूप में और मजबूत की है। भारतीय दवा उद्योग वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और आने वाले वर्षों में इसके और विस्तार की उम्मीद है।

--आईएएनएस

डीबीपी