नई दिल्ली, 9 जुलाई (आईएएनएस)। भारत में दुनिया के करीब आधे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) मौजूद हैं और देश एंटरप्राइस एआई टैलेंट के दूसरे सबसे बड़े हब के रूप में उभर रहा है। यह इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और हाई-वैल्यू ग्लोबल ऑपरेशन में देश की बढ़ती भागीदारी को दिखाता है। यह बयान मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को दिया।
राष्ट्रीय राजधानी में सीआईआई जीसीसी बिजनेस समिट में नागेश्वरन ने कहा कि भारत का जीसीसी इकोसिस्टम बीते दो दशकों में एक बड़े बदलाव के दौर से गुजरा है। इसमें बैक-ऑफिस से 2,000 से अधिक सेंटर तक का बड़ा बदलाव शामिल है, जिसमें आज 20 लाख से ज्यादा पेशेवरों को रोजगार मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि इस सेक्टर में रोजगार अब 23 लाख के करीब पहुंच रहा है, जबकि सालाना आय 60 अरब डॉलर से अधिक हो गई है और 100 अरब डॉलर के करीब पहुंचने की राह पर है।
नागेश्वरन ने कहा, "दुनिया के लगभग आधे जीसीसी अब भारत में हैं। यह अचानक नहीं हुआ। यह हमारे लोगों की वजह से हुआ, क्योंकि टैलेंट ही सबसे अहम चीज है।"
उन्होंने बताया, "ये सेंटर पहले लागत कम रखने के लिए भारत आए थे, लेकिन अपनी काबिलियत की वजह से यहीं टिके रहे।"
सीईए ने कहा कि जीसीसी अब भारत की जीडीपी में लगभग 2 प्रतिशत का योगदान देते हैं और भारत के बड़े शहरों में बनने वाली नई ऑफिस स्पेस में इनका बड़ा हिस्सा होता है। उन्होंने कहा कि भारत के पैमाने के आस-पास भी कोई दूसरा देश नहीं है, क्योंकि दुनिया के लगभग आधे जीसीसी अब यहीं से काम कर रहे हैं।
इस सेक्टर के विकास के बारे में बताते हुए नागेश्वरन ने कहा कि भारतीय जीसीसी अब कम लागत में बैक-ऑफिस सपोर्ट देने वाली अपनी पारंपरिक भूमिका से कहीं आगे निकल चुके हैं। आज वे टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, एनालिटिक्स और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में हाई-वैल्यू वाले काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल बैंक मुंबई और बेंगलुरु से रिस्क सिस्टम और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को मैनेज करते हैं, ऑटोमोबाइल कंपनियां चेन्नई और पुणे से गाड़ियों और एम्बेडेड सिस्टम की डिजाइन तैयार करती हैं, सेमीकंडक्टर कंपनियां भारत में चिप डिजाइन का काम करती हैं, फार्मास्युटिकल कंपनियां क्लिनिकल एनालिटिक्स करती हैं और कंज्यूमर कंपनियां अपने भारतीय सेंटर्स से डिजिटल प्रोडक्ट डेवलप करती हैं।
उन्होंने कहा, "इन सेंटर्स में बनाई गई बौद्धिक संपदा असली है। पेटेंट यहीं फाइल किए जाते हैं, प्रोडक्ट यहीं से भेजे जाते हैं और ग्लोबल भूमिकाएं भी तेजी से यहीं बैठे लोग निभा रहे हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय जीसीसी कई मल्टीनेशनल कंपनियों (एमएनसी) के कामकाज का मुख्य केंद्र बन गए हैं।