नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। चालू कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही में शीर्ष सात प्रमुख बाजारों में कुल लीजिंग 10.5 प्रतिशत बढ़कर 62.7 लाख वर्ग फुट पहुंच गई है और यह भारत के रिटेल क्षेत्र में चार वर्षों में छमाही आधार पर लीजिंग का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह जानकारी मंगलवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
कमर्शियल रियल एस्टेट सर्विसेज फर्म जेएलएल की रिपोर्ट में कहा गया है कि मांग को प्रभावित करने वाले कई बाहरी कारकों के बावजूद भारतीय रिटेल बाजार ने मजबूत वृद्धि का रुझान दिखाया है।
जनवरी से जून 2026 के बीच रिटेल स्पेस की मांग स्थिर बनी रही और आपूर्ति की कमी के बावजूद खुदरा विक्रेताओं के विस्तार के चलते पहली तिमाही में कुल लीजिंग 30.9 लाख वर्ग फुट रही।
वहीं, दूसरी तिमाही में लीजिंग की रफ्तार और मजबूत हुई। यह क्रमिक रूप से 2.7 प्रतिशत बढ़कर 31.8 लाख वर्ग फुट हो गई। इस विस्तार में मुख्य रूप से घरेलू ब्रांडों का योगदान रहा, जिनकी कुल लीजिंग में 79.1 प्रतिशत हिस्सेदारी रही।
भारत के शीर्ष सात शहरों में मुंबई (29 प्रतिशत) और दिल्ली एनसीआर (24 प्रतिशत) की 2026 की पहली छमाही के कुल लीजिंग वॉल्यूम में 53 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। बेंगलुरु (23 प्रतिशत) को मिलाकर इन तीनों प्रमुख बाजारों ने रिटेल स्पेस की कुल मांग का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभाला।
हालांकि, 2026 की दूसरी तिमाही में नए शॉपिंग मॉल की आपूर्ति सीमित रही, लेकिन दिल्ली एनसीआर और हैदराबाद के बाहरी इलाकों में नए रिटेल स्पेस की उपलब्धता ने अपने भौतिक स्टोर नेटवर्क का विस्तार करने वाले रिटेलर्स को नए अवसर प्रदान किए।
2026 की पहली छमाही में नए शॉपिंग मॉल की आपूर्ति 8.2 लाख वर्ग फुट रही, जो 2025 की पहली छमाही में दर्ज की गई मजबूत आपूर्ति की तुलना में वर्ष-दर-वर्ष आधार पर 64 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है।
पिछले छह से नौ महीनों से, प्रमुख रिटेल ब्रांड शॉपिंग मॉल में गुणवत्तापूर्ण स्थान की कमी के कारण विस्तार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसने उन्हें स्टोर विस्तार के लिए वैकल्पिक प्रारूपों का मूल्यांकन करने पर मजबूर किया है।
उपभोक्ताओं की अनुभव-आधारित खुदरा प्राथमिकताओं के कारण संगठित रिटेल स्पेस की मांग मजबूत हुई है। इसके साथ ही कुल लीजिंग में मॉल की हिस्सेदारी 2025 की पहली छमाही के 38.9 प्रतिशत से बढ़कर 2026 की पहली छमाही में 43.1 प्रतिशत हो गई है।