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चंद्रशेखरन के इस्तीफे से टाटा ग्रुप के शेयर धड़ाम; मार्केट कैप 68,000 करोड़ रुपए घटा

चंद्रशेखरन

मुंबई, 12 अगस्त (आईएएनएस)। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद बुधवार को टाटा ग्रुप के शेयरों में बड़ी बिकवाली देखने को मिली और इससे समूह की सभी लिस्टेड कंपनियों का मार्केटकैप संयुक्त रूप से 68,000 करोड़ रुपए से अधिक कम हो गया।

ग्रुप की 17 लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 68,119 करोड़ रुपए घटकर 26.32 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो की पिछले सत्र में करीब 27 लाख करोड़ रुपए था।

मार्केट वैल्यू में आई गिरावट में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का हिस्सा सबसे अधिक था।

सत्र के दौरान देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी के शेयर 4.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,323.30 रुपए पर बंद हुए, जिससे कंपनी का मार्केटकैप 42,440 करोड़ रुपए घटकर 8.40 लाख करोड़ रुपए रह गया।

ग्रुप की वैल्यूएशन में गिरावट की दूसरी सबसे बड़ी वजह टाइटन रही। इसके शेयर में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट के कारण कंपनी का मार्केटकैप 9,304 करोड़ रुपए हो गया है।

गिरावट में योगदान देने वाली अन्य प्रमुख कंपनियों में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स शामिल है, जिसका बाजार पूंजीकरण 4,898 करोड़ रुपए घटा और टाटा स्टील के मार्केटकैप में 4,745 करोड़ रुपए की कमी देखी गई।

टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की मार्केट वैल्यू में 3,098 करोड़ रुपए की कमी आई, जबकि टाटा पावर और इंडियन होटल्स को क्रमशः 1,598 करोड़ रुपए और 1,566 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

कई दूसरी टाटा कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। टाटा कम्युनिकेशंस की मार्केट वैल्यू में 812 करोड़ रुपए, टाटा एलेक्सी में 606 करोड़ रुपए, ट्रेंट में 907 करोड़ रुपए, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन में 508 करोड़ रुपए और तेजस नेटवर्क्स में 265 करोड़ रुपए की कमी आई।

टाटा टेलीसर्विसेज (महाराष्ट्र) की मार्केट कैपिटलाइजेशन में भी गिरावट आई।

टाटा ग्रुप के सभी शेयरों में बिकवाली नहीं हुई।

टाटा मोटर्स की मार्केट वैल्यू में 1,786 करोड़ रुपए का इजाफा हुआ, जबकि टाटा कैपिटल को 700 करोड़ रुपए का फायदा हुआ।

टाटा केमिकल्स और वोल्टास में भी मामूली बढ़त देखी गई और इनकी मार्केट वैल्यू में क्रमशः 167 करोड़ रुपए और 66 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हुई।

यह बिकवाली तब हुई जब एक बोर्ड मेंबर ने चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के प्रस्ताव का विरोध किया, जिसके बाद उन्होंने कार्यकाल न बढ़ाने का फैसला किया।

चंद्रशेखरन के मुताबिक, इस मामले को लेकर लंबे समय से बनी अनिश्चितता के कारण बोर्ड के लिए उत्तराधिकार की योजना पर आगे बढ़ना जरूरी हो गया था।

एक बयान में चंद्रशेखरन ने कहा कि उन्होंने टाटा ग्रुप में अपने प्रोफेशनल करियर के चार दशक पूरे कर लिए हैं। उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर अपने लगभग दस साल के कार्यकाल को एक सम्मान और बड़ी जिम्मेदारी बताया।

--आईएएनएस

एबीएस/