नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि 'ब्रिक्स स्पेस इकोनॉमी' वैश्विक विकास का अगला बड़ा क्षेत्र बन सकती है। उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देशों से नवाचार, निवेश, उद्यमिता और सतत विकास के नए अवसरों को खोलने के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
बेंगलुरु में आयोजित ब्रिक्स स्पेस एजेंसियों के प्रमुखों (एचओएसए) की बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास वह आकार, वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी ताकत और औद्योगिक संसाधन मौजूद हैं, जिनके बल पर वे तेजी से बढ़ रही वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक बड़ी शक्ति बन सकते हैं।
उन्होंने कहा, "भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था उन देशों से नहीं बनेगी जो अलग-अलग काम करेंगे। यह साझेदारी, साझा नवाचार और सामूहिक महत्वाकांक्षा के माध्यम से आकार लेगी। ब्रिक्स देशों में इस उभरते वैश्विक अंतरिक्ष तंत्र का एक मजबूत स्तंभ बनने की क्षमता है।"
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत सभी ब्रिक्स साझेदार देशों के साथ मिलकर साझा लक्ष्यों को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को विकास, मजबूती, नवाचार, सतत विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रभावी माध्यम बनाए रखने के लिए भारत लगातार सहयोग बढ़ाएगा।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय बैठक में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुख और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में ब्रिक्स देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई और कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
बैठक में अंतरिक्ष क्षेत्र की स्थिरता (स्पेस सस्टेनेबिलिटी), अंतरिक्ष मलबे से मुक्त मिशन, ब्रिक्स रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन (आरएसएससी) को मजबूत बनाने, नए ब्रिक्स सदस्य देशों की भागीदारी बढ़ाने और प्रस्तावित ब्रिक्स स्पेस काउंसिल पर आगे की चर्चा जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
डॉ. सिंह ने आगे कहा कि अंतरिक्ष तकनीक आज आर्थिक परिवर्तन और सामाजिक प्रगति की सबसे प्रभावशाली ताकतों में से एक बन चुकी है।
उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष तकनीक की मदद से संचार नेटवर्क, नेविगेशन सिस्टम, आपदा प्रबंधन, कृषि, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और पर्यावरण निगरानी जैसे क्षेत्रों को मजबूती मिल रही है।
ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि यह समूह दुनिया की बड़ी आबादी, आर्थिक क्षमता, वैज्ञानिक विशेषज्ञता और तकनीकी संसाधनों का प्रतिनिधित्व करता है।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच गहरा सहयोग नवाचार, औद्योगिक साझेदारी, तकनीकी हस्तांतरण, निवेश और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा कर सकता है। साथ ही यह सदस्य देशों की साझा विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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