भारत इनोवेट्स 2026: भारतीय नवाचार को सिलिकॉन वैली में मिला बड़ा सम्मान, स्टार्टअप्स और एआई ने बढ़ाई वैश्विक पहचान

भारत इनोवेट्स 2026: भारतीय नवाचार को सिलिकॉन वैली में मिला बड़ा सम्मान, स्टार्टअप्स और एआई ने बढ़ाई वैश्विक पहचान

वॉशिंगटन, 13 जून (आईएएनएस)। भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को पिछले पांच वर्षों में सिलिकॉन वैली में "जबरदस्त सम्मान" मिला है। यह बदलाव स्टार्टअप्स की बढ़ती संख्या, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित उद्यमों और वैश्विक निवेश में तेजी के कारण संभव हुआ है। उद्यमी और निवेशक शशि त्रिपाठी ने फ्रांस में आयोजित होने वाले 'भारत इनोवेट्स 2026' शिखर सम्मेलन से पहले न्यूज एजेंसी आईएएनएस से खास बातचीत में यह जानकारी दी।

त्रिपाठी ने कहा, "भारत ने एआई, प्रौद्योगिकी और समग्र नवाचार के क्षेत्र में कई शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं। नवाचार के मामले में भारत के प्रति सम्मान काफी बढ़ा है।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा उद्घाटन किए जाने वाले 'भारत इनोवेट्स 2026' सम्मेलन में प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से चुने गए 100 भारतीय स्टार्टअप्स अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करेंगे। त्रिपाठी ने कहा कि यह आयोजन वैश्विक नवाचार और उद्यमिता केंद्र के रूप में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को दर्शाता है।

त्रिपाठी ने आगे आईएएनएस को बताया कि सिलिकॉन वैली का भारत को देखने का नजरिया तेजी से बदला है। अब भारतीय उद्यमी केवल पारंपरिक तकनीकी सेवाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि एआई, फिनटेक, खुदरा प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष नवाचार जैसे उभरते क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा, "भारत में नई अंतरिक्ष तकनीकें विकसित हो रही हैं। नए फिनटेक समाधान सामने आ रहे हैं। खुदरा क्षेत्र में नए मॉडल तैयार किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर भारत में बड़े पैमाने पर नवाचार हो रहा है।"

उन्होंने कहा कि बढ़ते नवाचार के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा भी भारत पर बढ़ा है। वैश्विक तकनीकी कंपनियां और उद्यम पूंजी निवेशक भारत में बड़े स्तर पर निवेश कर रहे हैं।

शशि त्रिपाठी ने कहा, "सिलिकॉन वैली से भारत में नए निवेश लगातार आ रहे हैं। नवाचार की वजह से भारत में बड़ी मात्रा में पूंजी लगाई जा रही है।"

त्रिपाठी ने भारत की प्रगति का एक बड़ा कारण सामाजिक सोच में बदलाव को बताया। उनके अनुसार अब युवा नौकरी की बजाय उद्यमिता को भी करियर के रूप में अपना रहे हैं। उन्होंने कहा, "अब संस्कृति बदल चुकी है। जब मैंने पढ़ाई पूरी की थी, तब स्नातक होने के तुरंत बाद कंपनी शुरू करने की कल्पना भी नहीं कर सकता था।"

उन्होंने बताया कि आज कई छात्र अपनी पढ़ाई पूरी होने से पहले ही स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "अब असफलता को स्वीकार किया जाने लगा है और जब तक असफलता नहीं मिलेगी, तब तक नवाचार भी नहीं होगा।"

त्रिपाठी ने 'भारत इनोवेट्स 2026' को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय स्टार्टअप्स को वैश्विक बाजारों, निवेशकों और तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा, "सहयोग बेहद जरूरी है। दुनिया में क्या हो रहा है, उसे समझना और खुद की तुलना वैश्विक स्तर से करना महत्वपूर्ण है।"

उन्होंने बताया कि सम्मेलन के लिए चुने गए स्टार्टअप्स भारत की सबसे मजबूत उभरती कंपनियों में शामिल हैं। ये एआई, फिनटेक, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और उन्नत इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। त्रिपाठी ने कहा, "ये बेहद उत्कृष्ट स्टार्टअप्स हैं। इनकी गुणवत्ता बहुत उच्च स्तर की है।"

त्रिपाठी ने भारत में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दिया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने नवाचार को केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे छोटे शहरों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा, "मैं स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने और उसे गति देने का श्रेय उन्हें दूंगा। उन्होंने इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।"

उन्होंने बताया कि अब दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों से भी नवाचार सामने आ रहे हैं, जिससे आर्थिक विकास में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो रही है। हालांकि, त्रिपाठी का मानना है कि भारत को दुनिया के अग्रणी नवाचार केंद्रों से प्रतिस्पर्धा करने के लिए और अधिक महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम करना होगा।

उन्होंने कहा, "भारत के पास प्रतिभा है, क्षमता है और बड़े नवाचार करने का साहस भी है। भारत यह कर सकता है।"

उन्होंने सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच गहरे सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। विशेष रूप से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) की भूमिका को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।

शशि त्रिपाठी ने कहा, "आईआईटी ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है और मेरा मानना है कि आगे भी आईआईटी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बनी रहेगी।"

--आईएएनएस

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