अल नीनो के कारण 2027 में सार्डिन की उपलब्धता में भारी कमी आ सकती है: सीएमएफआरआई

अल नीनो के कारण 2027 में सार्डिन की उपलब्धता में भारी कमी आ सकती है: सीएमएफआरआई

कोच्चि, 10 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के कारण अगले साल सार्डिन मछली पकड़ने पर असर पड़ सकता है।

हालांकि इस साल भारतीय तेल सार्डिन का भंडार प्रचुर मात्रा में है, लेकिन सीएमएफआरआई ने कहा है कि अल नीनो के कारण 2027 में सार्डिन की उपलब्धता में भारी कमी आ सकती है। समुद्री तापप्रपात और बढ़ते समुद्री तापमान से भारतीय तट पर मछली उत्पादन खतरे में पड़ सकता है।

सीएमएफआरआई के निदेशक डॉ. ग्रिंसन जॉर्ज ने शुक्रवार को संस्थान में राष्ट्रीय मत्स्यपालक दिवस समारोह का उद्घाटन करते हुए यह चेतावनी दी।

डॉ. जॉर्ज के अनुसार, अल नीनो से जुड़ी गर्मी इस साल अक्टूबर-दिसंबर के दौरान और तेज होने की आशंका है, जिसका असर अप्रैल-मई 2027 तक उत्तरी हिंद महासागर में महसूस किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इस साल ऑयल सार्डिन का भंडार प्रचुर मात्रा में है, लेकिन अनुमानित तापमान वृद्धि होने पर 2027 में इस संसाधन पर असर पड़ने की संभावना है। छोटी पेलाजिक मछलियां, विशेष रूप से ऑयल सार्डिन, समुद्री ताप तरंगों और महासागर के तापमान में वृद्धि के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं।

डॉ. जॉर्ज ने चेतावनी दी कि अनुमानित तापमान वृद्धि से समुद्री मछली उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे मछली पकड़ने का उद्योग और तटीय समुदायों की आजीविका दोनों प्रभावित होंगी।

जलवायु पूर्वानुमानों की ओर ध्यान दिलाते हुए उन्होंने कहा कि उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी से पता चलता है कि अगले साल अप्रैल और मई के दौरान समुद्री ताप तरंगों, समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि और खारेपन में वृद्धि की उच्च संभावना है।

उन्होंने चेतावनी दी कि इसका प्रभाव सार्डिन तक ही सीमित नहीं रहेगा।

लगातार महासागर के तापमान में वृद्धि से नाजुक प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे प्रवाल विरंजन हो सकता है और रेड स्नैपर जैसी प्रवाल भित्ति से जुड़ी प्रजातियों की संख्या में कमी आ सकती है।

मछली पकड़ने वाले समुदाय को बदलते हालातों के लिए तैयार करने में मदद करने के लिए सीएमएफआरआई ने घोषणा की कि वह इस साल के अंत में मछुआरों और मछली पालकों को अल नीनो संबंधी सलाह जारी करना शुरू कर देगा, जिससे वे मछली पकड़ने और मत्स्य पालन प्रथाओं के बारे में सोच-समझकर निर्णय ले सकें।

मछली पालकों को भी अचानक होने वाले पर्यावरणीय परिवर्तनों के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई। डॉ. जॉर्ज ने कहा कि लंबे समय तक उच्च तापमान और खारेपन के बाद भारी बारिश से खारेपन के स्तर में तेजी से उतार-चढ़ाव आ सकता है, जिससे तटीय मत्स्य पालन बाधित हो सकता है और उत्पादन हानि का खतरा बढ़ सकता है।

--आईएएनएस

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