उत्तरकाशी में एकल उपयोग प्लास्टिक के खिलाफ जागरूकता संगोष्ठी आयोजित

हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन और प्लास्टिक प्रदूषण पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता

उत्तरकाशी: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्लांटिका फाउंडेशन तथा श्रीमती मंजिरा देवी विश्वविद्यालय, उत्तरकाशी द्वारा पर्यावरण सूचना, जागरूकता, क्षमता निर्माण एवं आजीविका कार्यक्रम (ईआईएसीपी) हब-उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, देहरादून के तत्वावधान में “एकल उपयोग प्लास्टिक को ना कहें” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, सतत कृषि, प्लास्टिक प्रदूषण तथा स्वच्छ जल प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रभागीय वनाधिकारी टिहरी डैम-द्वितीय साक्षी रावत ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने घटती बर्फबारी, वन्यजीवों के बदलते व्यवहार और मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए जनसहभागिता को आवश्यक बताया।

उत्तराखण्ड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पर्यावरण अभियंता अमित पोखरियाल ने समाज, आजीविका, कृषि और पर्यावरण के परस्पर संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बढ़ती जनसंख्या और सीमित प्राकृतिक संसाधनों के कारण पर्यावरणीय चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए संसाधनों के संतुलित उपयोग और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता है।

श्रीमती मंजिरा देवी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भगवन नौटियाल ने पर्वतीय कृषि की चुनौतियों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि को टिकाऊ बनाने के लिए वैज्ञानिक एवं सतत कृषि पद्धतियों को अपनाना समय की मांग है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

संगोष्ठी में विभिन्न विशेषज्ञों ने हिमालयी पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े विषयों पर व्याख्यान दिए। वक्ताओं ने कहा कि एकल उपयोग प्लास्टिक पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुका है और इसके उपयोग को रोकने के लिए व्यापक जनजागरूकता आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंतर्गत शोधार्थियों द्वारा पर्यावरण एवं सतत विकास विषयक पोस्टर प्रस्तुतियां भी दी गईं। इसके साथ ही ग्राम हितानु में “एकल उपयोग प्लास्टिक को ना कहें” विषय पर वृक्षारोपण एवं जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान लोगों को प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया।

समापन सत्र में प्रो. अनूप बड़ोनी ने संगोष्ठी का निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि जैव विविधता संरक्षण, जलवायु अनुकूल कृषि, स्वच्छ जल उपलब्धता तथा प्राकृतिक संसाधनों का सतत प्रबंधन भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया।

कार्यक्रम का समापन आयोजन सचिव डॉ. पल्लवी चौहान के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी, पर्यावरण विशेषज्ञ तथा विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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