यूएन के विशेष दूत ने हूती हमलों को लेकर दी चेतावनी, बोले-बड़े पैमाने पर संघर्ष की ओर बढ़ सकता है यमन

यूएन के विशेष दूत ने हूती हमलों को लेकर दी चेतावनी, बोले-बड़े पैमाने पर संघर्ष की ओर बढ़ सकता है यमन

अदन (यमन), 10 अगस्त (आईएएनएस)। यमन के लिए यूएन के विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने सोमवार को यमन सरकार के कब्जे वाले शहर मोचा पर हूती समूह के हालिया हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि मिलिट्री की बढ़ोतरी यमन को बड़े पैमाने पर लड़ाई की ओर धकेल सकती है।

ग्रंडबर्ग ने एक बयान में कहा कि मोचा पर हुए हमलों में कथित तौर पर आम लोगों और सेना के लोगों की मौत हुई और शहर के पोर्ट पर मौजूद सुविधाओं समेत इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने कहा कि ये हमले अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम समझौते के लागू होने के बाद से सैन्य गतिविधि में सबसे ज्यादा तेजी के बीच हुए। इससे यमन में बड़े पैमाने पर फिर से लड़ाई का खतरा तेजी से बढ़ गया है।

यूएन के दूत ने पार्टियों से ज्यादा से ज्यादा संयम बरतने और 2022 के युद्धविराम के बाद बनी शांति बनाए रखने और तनाव कम करने के लिए ठोस उपायों पर उनके ऑफिस के साथ काम करने की अपील की।

स्थानीय सूत्रों ने बताया कि रविवार को हूती समूह ने लाल सागर के बंदरगाह शहर मोचा और देश के पश्चिमी तट पर सरकार के कब्जे वाले दूसरे इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन से कई हमले किए। इन हमलों में कम से कम आठ लोग मारे गए।

एक स्थानीय मेडिकल सोर्स ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि दक्षिण-पश्चिमी ताइज प्रांत में सरकार के कब्जे वाले मोचा पोर्ट और आस-पास के इलाकों में हूती हमलों में चार आम नागरिक और चार सरकारी मिलिट्री के लोग मारे गए और करीब 32 लोग घायल हो गए।

बंदरगाह के निदेशक अब्दुल मलिक अल-शराबी ने एक प्रेस बयान में कहा कि हूती विद्रोहियों ने इस सुविधा पर दर्जनों ड्रोन दागे, जिनमें से लगभग 25 ने आर्थिक प्रतिष्ठानों, कर्मचारी आवास और एक कस्टम हैंगर को निशाना बनाया।

यमन के परिवहन मंत्रालय ने बताया कि बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों से बंदरगाह के बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा है। मंत्रालय ने सरकारी नियंत्रण वाले क्षेत्रों के बंदरगाहों, हवाई अड्डों और भूमि सीमा पारगमन बिंदुओं पर तैयारियां बढ़ा दी हैं और आपातकालीन उपायों को और मजबूत किया है।

यमन 2014 के अंत से संघर्ष में फंसा हुआ है। तब हूती विद्रोहियों ने उत्तरी यमन के बड़े हिस्से, जिसमें राजधानी सना भी शामिल है, पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में हस्तक्षेप किया था।

संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से अप्रैल 2022 में युद्धविराम लागू हुआ था, जो उसी साल अक्टूबर में बिना औपचारिक विस्तार के समाप्त हो गया। हालांकि उसके बाद भी नाजुक संघर्षविराम काफी हद तक बना रहा और बड़े पैमाने की शत्रुता में काफी कमी आई थी, जो हाल की ताजा तनाव बढ़ने तक जारी रही।

--आईएएनएस

केके/पीएम