सोल, 22 जून (आईएएनएस)। मतपत्रों में कमी को लेकर दक्षिण कोरिया का एक बड़ा वर्ग विरोध कर रहा है। सरकारी मशीनरी पर दबाव बढ़ा है और प्रतिपक्ष के नेता राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग (एनईसी) को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इस बीच कानूनी सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने सोमवार को उन सरकारी कर्मचारियों से पूछताछ करने की तैयारी की है जो 3 जून को हुए स्थानीय चुनावों के दौरान उन केंद्रों पर तैनात थे जहां मतपत्रों का संकट रहा।
योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि आठ अधिकारियों को पुलिस और अभियोजन पक्ष की संयुक्त जांच टीम के सामने पेश होने के लिए कहा गया है। यह टीम देशभर के 26 मतदान केंद्रों पर हुई मतपत्रों की कमी की जांच कर रही है, जिसके कारण कुछ समय के लिए मतदान रोकना पड़ा था।
बताया जा रहा है कि संबंधित सरकारी कर्मचारियों को सोल के उन दो मतदान केंद्रों के प्रबंधन के लिए तैनात किया गया था, जहां मतपत्र खत्म होने की समस्या सामने आई थी।
सूत्रों के मुताबिक, जांचकर्ता उनसे उस समय चुनाव निगरानी संस्था (नेशनल इलेक्शन कमीशन यानी एनईसी) द्वारा उठाए गए कदमों और स्थिति से निपटने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी लेंगे।
यह कार्रवाई 11 जून को संयुक्त जांच टीम की ओर से एनईसी कार्यालय पर की गई छापेमारी के बाद हो रही है। जांच टीम मतपत्रों की कमी की घटना की जांच कर रही है।
मतपत्रों की कमी के बाद जनता में नाराजगी बढ़ गई है। इसके चलते दक्षिणी सोल स्थित एक जिम्नेजियम के बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, यहीं मतगणना केंद्र बनाया गया था। कुछ प्रदर्शनकारी चुनाव दोबारा कराने की मांग पर अड़े हैं।
एसके ओलंपिक हैंडबॉल जिम्नेजियम के बाहर प्रदर्शन सोमवार तक लगातार 18वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने मतदान पेटियों को हटाने से रोकने के लिए परिसर के प्रवेश द्वारों को बाधित किया।
हालांकि एनईसी ने मतपत्रों की कमी के लिए माफी मांगी है, लेकिन उसका कहना है कि चुनाव कानून के तहत यह घटना दोबारा चुनाव कराने का आधार नहीं बनती।
कार्यवाहक राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी प्रमुख यू जे-सियोंग ने कहा कि जिम्नेजियम के अंदर रखी मतदान पेटियों को हटाने के लिए "सामाजिक सहमति" जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाने से परहेज किया है।
यू ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पुलिस को प्रदर्शन से निपटते समय सार्वजनिक सुरक्षा और अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि इन प्रदर्शनों का कोई स्पष्ट आयोजक नहीं है।
उन्होंने बताया कि पुलिस इन प्रदर्शनों से जुड़े 36 मामलों की जांच कर रही है, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारियों की ओर से महिला राष्ट्रीय युवा हैंडबॉल टीम के सदस्यों की कथित अवैध तलाशी का मामला भी शामिल है।
यू ने दोहराया कि प्रदर्शनकारियों के गंभीर अवैध कार्यों के खिलाफ पुलिस "तेज और कड़ी कार्रवाई" करेगी।